भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार विकेटकीपर-बल्लेबाज ऋषभ पंत का उत्तराखंड से जुडाव एक बार फिर चर्चा में है. आयकर विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2025-26 में पंत ने उत्तराखंड में 23.84 करोड़ रुपये का आयकर जमा कराया. इसके साथ ही वह प्रदेश के शीर्ष गैर-कॉरपोरेट करदाताओं में चौथे स्थान पर रहे.
इस सूची में सिग्नेचर फाइटोकेमिकल्स इंडस्ट्रीज 54 करोड़ रुपये के साथ पहले, कैलाश रिवर बेड मिनरल 40.74 करोड़ रुपये के साथ दूसरे और उत्तरांचल ग्रामीण बैंक 28.95 करोड़ रुपये के साथ तीसरे स्थान पर रहा. वहीं, कॉरपोरेट श्रेणी में ओएनजीसी 13,564 करोड़ रुपये के आयकर योगदान के साथ सबसे ऊपर रही.
ऋषभ पंत लगातार दूसरे वर्ष उत्तराखंड के प्रमुख निजी आयकरदाताओं में शामिल हुए हैं. उनके इस बड़े कर योगदान के बीच अब राज्य में अपना स्थायी ठिकाना बनाने की उनकी इच्छा भी सामने आई है. पंत ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को इंटरनेट मीडिया के जरिए अपनी परेशानी बताई है.
पंत ने बताया कि वह दिल्ली से अपना आधार उत्तराखंड स्थानांतरित करना चाहते हैं और इसके लिए राज्य में जमीन खरीदने की कोशिश कर रहे हैं. हालांकि, करीब तीन साल से प्रयास करने के बावजूद उन्हें अपने रहने के लिए उपयुक्त और स्पष्ट जमीन नहीं मिल पा रही है. उन्होंने कहा कि वह अपने पहाड़ी लोगों के बीच वापस लौटना चाहते हैं और उत्तराखंड के विकास में योगदान देना चाहते हैं. पंत ने मुख्यमंत्री से जमीन खरीद की प्रक्रिया में मदद करने का अनुरोध किया है.
ऋषभ पंत ने साफ किया कि वह सरकार से मुफ्त जमीन या किसी तरह का उपहार नहीं मांग रहे हैं. उन्होंने कहा कि वह सरकारी नियमों के तहत और सरकारी दर पर जमीन खरीदना चाहते हैं, ताकि उत्तराखंड में अपना पहला घर बना सकें. उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें जमीन खरीद की प्रक्रिया की पूरी जानकारी नहीं है और इसी वजह से मदद की जरूरत है.
पंत की अपील के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी जवाब दिया. उन्होंने क्रिकेटर को उत्तराखंड का गौरव बताते हुए कहा कि उनकी मातृभूमि के प्रति प्रेम और राज्य लौटकर योगदान देने की इच्छा सराहनीय है. मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को पंत के मामले में जरूरी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं. उन्होंने कहा कि अधिकारी जल्द ही ऋषभ पंत से संपर्क करेंगे और नियमानुसार हरसंभव सहयोग सुनिश्चित करेंगे.