चंडीगढ़ में लंबे समय से अटकी कई विकास परियोजनाओं के लिए राहत भरी खबर सामने आई है. केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने केंद्र शासित प्रदेश के लिए पर्यावरण मंजूरी से जुड़ी दो प्रमुख समितियों का पुनर्गठन कर उन्हें अधिसूचित कर दिया है. इस फैसले से उन परियोजनाओं को नई गति मिलने की उम्मीद है, जो पर्यावरणीय स्वीकृति के अभाव में वर्षों से लंबित थीं. इनमें नई सब्जी मंडी और बल्क मैटेरियल मार्केट जैसी योजनाएं प्रमुख रूप से शामिल हैं.
सेक्टर-39 में प्रस्तावित नई सब्जी मंडी परियोजना को इस निर्णय का सबसे अधिक लाभ मिलने की संभावना है. लगभग 76 एकड़ क्षेत्र में विकसित होने वाली इस आधुनिक मंडी को शहर की भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है. परियोजना के अंतर्गत कई भूखंडों की नीलामी पहले ही पूरी हो चुकी है, लेकिन पर्यावरणीय स्वीकृति न मिलने के कारण विकास कार्य शुरू नहीं हो पाए थे. अब नई व्यवस्था लागू होने के बाद प्रशासन को निर्माण प्रक्रिया आगे बढ़ाने में आसानी होगी. भविष्य में सेक्टर-26 स्थित मौजूदा सब्जी मंडी को भी यहां स्थानांतरित करने की योजना है, जिससे व्यापारिक गतिविधियों को बेहतर ढांचा मिल सकेगा.
धनास स्थित मार्बल मार्केट को स्थानांतरित करने के उद्देश्य से सेक्टर-56 में प्रस्तावित बल्क मैटेरियल मार्केट परियोजना को भी नई उम्मीद मिली है. लगभग 22 करोड़ रुपये की लागत वाली इस योजना के तहत करीब 200 शोरूम विकसित किए जाने हैं. यह परियोजना लंबे समय से पर्यावरण मंजूरी की प्रतीक्षा कर रही थी, जिसके कारण काम आगे नहीं बढ़ सका. नई समितियों के गठन के बाद अब इस परियोजना की फाइलों पर तेजी से कार्रवाई होने की संभावना है. इससे व्यापारियों को आधुनिक सुविधाएं मिलने के साथ-साथ शहर में सुव्यवस्थित व्यावसायिक ढांचा विकसित होगा.
नई पर्यावरणीय व्यवस्था का लाभ केवल बाजार परियोजनाओं तक सीमित नहीं रहेगा. अस्पतालों, शैक्षणिक संस्थानों और बड़े बुनियादी ढांचा विकास कार्यों को भी इसका फायदा मिलेगा. जिन परियोजनाओं के लिए पर्यावरण मंजूरी अनिवार्य होती है, वे अब अधिक व्यवस्थित और समयबद्ध प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ सकेंगी. इससे निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा और विकास कार्यों में आने वाली प्रशासनिक बाधाएं कम होंगी. विशेषज्ञों का मानना है कि इससे शहर में सार्वजनिक सुविधाओं के विस्तार की प्रक्रिया भी तेज होगी.
केंद्रीय मंत्रालय द्वारा गठित स्टेट एन्वायरमेंट इंपैक्ट असेसमेंट अथॉरिटी और एक्सपर्ट अप्रेजल कमेटी का कार्यकाल तीन वर्ष निर्धारित किया गया है. डॉ. हर्ष मित्तर को अथॉरिटी का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है, जबकि डॉ. रणदीप सिंह सैनी सदस्य की भूमिका निभाएंगे. वहीं, एक्सपर्ट अप्रेजल कमेटी की कमान डॉ. अविनाश कुमार शारदा को सौंपी गई है. अथॉरिटी परियोजनाओं के पर्यावरणीय प्रभाव का मूल्यांकन करेगी, जबकि विशेषज्ञ समिति तकनीकी पहलुओं की जांच कर अपनी सिफारिशें देगी. इससे मंजूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनने की उम्मीद है.