बदलती जीवनशैली और बढ़ती उम्र के साथ संक्रमणों का खतरा भी बढ़ जाता है, लेकिन वयस्कों और बुजुर्गों के टीकाकरण पर अब तक अपेक्षाकृत कम ध्यान दिया जाता रहा है. इसी जरूरत को देखते हुए चंडीगढ़ के जीएमसीएच-32 ने उत्तर भारत का पहला सरकारी ‘वयस्क एवं बुजुर्ग टीकाकरण क्लीनिक’ शुरू किया है. इस पहल का उद्देश्य लोगों को समय पर आवश्यक टीकों की जानकारी देना, रोगों से बचाव को मजबूत करना और स्वस्थ वृद्धावस्था को बढ़ावा देना है.
नए क्लीनिक की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को उसकी उम्र, पहले से मौजूद बीमारियों और जीवनशैली के आधार पर व्यक्तिगत टीकाकरण परामर्श दिया जाएगा. डॉक्टर यह भी बताएंगे कि किस व्यक्ति को कौन-सा टीका कब लगवाना चाहिए. इसके साथ ही आजीवन डिजिटल टीकाकरण रिकॉर्ड, समय पर टीका लगवाने के लिए डिजिटल रिमाइंडर और टीकाकरण के बाद नियमित फॉलो-अप जैसी आधुनिक सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी, जिससे लोगों को लंबे समय तक स्वास्थ्य संबंधी सहायता मिल सके.
इस क्लीनिक में इन्फ्लुएंजा, न्यूमोकोकल निमोनिया, हेपेटाइटिस-ए और बी, टायफायड, टीडैप, वैरीसेला और शिंगल्स सहित कई संक्रमणों से बचाव के टीके उपलब्ध होंगे. सामुदायिक चिकित्सा विभाग की प्रमुख डॉ. सोनिया पुरी ने बताया कि भारत में बच्चों के टीकाकरण को लंबे समय से प्राथमिकता दी गई है, लेकिन वयस्क और बुजुर्ग टीकाकरण अब भी अपेक्षाकृत उपेक्षित क्षेत्र है. इसी कमी को दूर करने के लिए विभाग विशेष प्रयास कर रहा है.
क्लीनिक का उद्घाटन प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने किया. उन्होंने इसे स्वस्थ और सक्रिय वृद्धावस्था की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताते हुए उम्मीद जताई कि जीएमसीएच-32 का यह मॉडल भविष्य में देश के अन्य सरकारी अस्पतालों के लिए भी प्रेरणा बनेगा. विभाग एक डिजिटल एडल्ट एंड एल्डरली वैक्सीनेशन रजिस्ट्री भी विकसित कर रहा है, जो को-विन और यू-विन की तर्ज पर कार्य करेगी. विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी पहलें भविष्य में गंभीर संक्रमणों और अस्पताल में भर्ती होने के मामलों को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं.