ब्यास नदी के किनारे बसे गांवों और किसानों के लिए बाढ़ से बचाव की तैयारियां तेज की गई हैं. सरकार ने अमृतसर रोड के ब्यास पुल से हरिके पत्तन तक संवेदनशील हिस्सों की जांच के बाद सुरक्षा कार्य कराए. जल संसाधन मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने विधानसभा में बताया कि इस क्षेत्र में 32.09 करोड़ रुपये के काम हुए हैं. इनमें 12 कार्य पूरे हैं और एक अभी चल रहा है.
सर्वेक्षण के बाद अमृतपुर, भरौआणा, शेख मांगा, सरूपवाल, भागो, आलूवाल, लोधीवाल, यूसफपुर दरवाल, तकिया समेत कई स्थानों को संवेदनशील चिन्हित किया गया. अधिकारियों की समितियों ने मौके पर निरीक्षण कर तकनीकी उपाय तय किए. विधायक राणा इंदर प्रताप सिंह ने किसानों की सुरक्षा का मुद्दा विधानसभा में उठाया था.
अमृतपुर राजेवाल में कटाव रोकने के लिए स्टड, रिवेटमेंट और स्पर बनाए गए. कपूरथला में बाएं किनारे का बाढ़ जोखिम घटाने का काम पूरा हुआ. गोइंदवाल, वैरोवाल और गाइड बांध मजबूत किए गए. 2025 की बाढ़ से प्रभावित एडवांस बांध नंबर दो और सुज्जो कालिया एडवांस बांध की बहाली भी पूरी हुई.
ढिलवां में क्षतिग्रस्त ढलानों को मजबूत किया गया, जबकि घड़का में दोनों किनारों पर रिवेटमेंट पूरा हुआ. मरड़ में दाएं किनारे 360 फुट लंबा रिवेटमेंट अभी बन रहा है. मनरेगा के तहत 11.98 करोड़ रुपये खर्च कर आहली कलां, आहली खुर्द, सफदरपुर खिजरपुर और घड़का के आसपास बाढ़ तथा कटावरोधी काम किए गए.
मंत्री के अनुसार पिछले पांच बाढ़ सीजन में इस हिस्से के किसी बाढ़ सुरक्षा बांध में दरार नहीं आई. सरकार का कहना है कि इन कार्यों से गांवों और खेती की जमीन की सुरक्षा मजबूत हुई है. मरड़ का काम पूरा होना बाकी है. संवेदनशील स्थानों पर निगरानी और जरूरी सुधार आगे भी जारी रखने की बात कही गई है.