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जीरकपुर में प्रकृति की अनोखी पहल, 50 दुर्लभ वृक्ष प्रजातियों को मिलेगा संरक्षण

जीरकपुर के गाजीपुर अर्बन फॉरेस्ट में पंजाब की दुर्लभ वृक्ष प्रजातियों को बचाने के लिए संरक्षण केंद्र तैयार किया जा रहा है. यहां करीब 50 महत्वपूर्ण प्रजातियों का संरक्षण और रोपण होगा.

Meenu Singh
Edited By: Meenu Singh
जीरकपुर में प्रकृति की अनोखी पहल, 50 दुर्लभ वृक्ष प्रजातियों को मिलेगा संरक्षण
Courtesy: AI

पंजाब में तेजी से बदलते शहरी वातावरण के बीच स्थानीय और दुर्लभ वृक्ष प्रजातियों को बचाने की दिशा में जीरकपुर में नई पहल शुरू हुई है. गाजीपुर रोड पर सुखना चो के पास स्थित गाजीपुर अर्बन फॉरेस्ट में एक्स सिटू कंजर्वेशन रिपॉजिटरी विकसित की जा रही है. पंजाब जैव विविधता बोर्ड के सहयोग से ग्रीन प्लैनेट सोसायटी इस केंद्र को तैयार कर रही है. इसका उद्देश्य दुर्लभ पेड़ों को सुरक्षित रखने के साथ विद्यार्थियों और शोधार्थियों को स्थानीय जैव विविधता से जोड़ना है.

50 दुर्लभ प्रजातियों को मिलेगा संरक्षण

प्रस्तावित रिपॉजिटरी में पंजाब की करीब 50 महत्वपूर्ण वृक्ष प्रजातियों का संरक्षण और रोपण किया जाएगा. पंजाब जैव विविधता बोर्ड के डॉ. गुरहरमिंदर सिंह के अनुसार, यह केंद्र जैव विविधता संरक्षण और उससे जुड़े अनुसंधान के लिए उपयोगी साबित हो सकता है. यहां प्रत्येक पौधे के साथ सूचना पट्ट और क्यूआर कोड लगाया जाएगा. इससे लोगों को संबंधित पेड़ की पहचान, वैज्ञानिक विशेषताओं और पर्यावरण में उसकी भूमिका की जानकारी आसानी से मिल सकेगी.

विद्यार्थियों के लिए बनेगा सीखने का केंद्र

इस परियोजना को भविष्य में राष्ट्रीय स्तर के सीखने और जैव विविधता संरक्षण केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है. विद्यार्थी और शोधार्थी यहां पंजाब की स्थानीय वनस्पतियों को करीब से समझ सकेंगे. ग्रीन प्लैनेट सोसायटी के अध्यक्ष सुमित भारद्वाज ने बताया कि गाजीपुर अर्बन फॉरेस्ट को संरक्षण, अनुसंधान और पर्यावरण शिक्षा से जोड़ने की दिशा में विकसित किया जा रहा है. इससे लोगों में स्थानीय पेड़ों और उनके महत्व को लेकर जागरूकता बढ़ाने में मदद मिलेगी.

25 एकड़ में लगाए जा चुके 25 हजार पेड़

गाजीपुर अर्बन फॉरेस्ट में अब तक 25 एकड़ क्षेत्र में करीब 25 हजार पेड़ लगाए जा चुके हैं. परियोजना को आगे बढ़ाते हुए वर्ष 2031 तक इस क्षेत्र को 112 एकड़ के सघन शहरी वन में बदलने का लक्ष्य रखा गया है. इस विस्तार से शहर के बीच हरित क्षेत्र बढ़ाने के साथ स्थानीय जैव विविधता को भी बेहतर आधार मिलने की उम्मीद है. संरक्षण केंद्र इस पूरी योजना का अहम हिस्सा होगा.

आने वाली पीढ़ियों को प्रकृति से जोड़ने की कोशिश

परियोजना से जुड़े लोगों का कहना है कि पेड़ लगाना ही संरक्षण का अंतिम लक्ष्य नहीं है. असली उद्देश्य ऐसी प्रजातियों को सुरक्षित रखना है, जिनका प्राकृतिक क्षेत्र लगातार सीमित हो रहा है. गाजीपुर अर्बन फॉरेस्ट में संरक्षण के साथ लोगों को प्रकृति से जोड़ने पर भी जोर दिया जा रहा है. यदि योजना अपने लक्ष्य के मुताबिक आगे बढ़ती है, तो यह क्षेत्र पंजाब की स्थानीय वनस्पतियों के संरक्षण और पर्यावरण शिक्षा का उपयोगी मॉडल बन सकता है.