बाबा फरीद यूनिवर्सिटी में नियुक्तियों पर बड़ा विवाद, 200 से ज्यादा कर्मचारी निलंबित

बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज में नियुक्तियों और पदोन्नतियों को लेकर विवाद बढ़ गया है. 200 से अधिक नए कर्मचारियों को निलंबित किया गया है, जबकि करीब दो दर्जन डॉक्टरों को उनके मूल विभागों में भेज दिया गया. अब नियुक्तियों की नियमों के अनुसार जांच होगी.

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Kuldeep Sharma

बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज में पूर्व कुलपति डॉ. राजीव सूद के कार्यकाल में हुई नियुक्तियां अब सवालों के घेरे में हैं. यूनिवर्सिटी प्रबंधन मंडल ने इन नियुक्तियों की समीक्षा का फैसला किया है. इसी के तहत बड़ी संख्या में कर्मचारियों पर कार्रवाई हुई है और डॉक्टरों की कुछ पदोन्नतियां भी वापस ले ली गई हैं.

200 से ज्यादा कर्मचारियों पर कार्रवाई

यूनिवर्सिटी प्रबंधन मंडल की 11 अगस्त को हुई बैठक के बाद 200 से अधिक हाल में नियुक्त कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया. प्रबंधन का कहना है कि कुछ नियुक्तियों में निर्धारित नियमों और जरूरी प्रक्रियाओं का पालन नहीं हुआ. कई पदों के लिए प्रबंधन मंडल की मंजूरी और बजट संबंधी स्वीकृति लिए जाने पर भी सवाल उठे हैं.

इनमें अनुसंधान अधिकारी और सहायक प्रोफेसर जैसे समूह-ए के पद शामिल बताए जा रहे हैं. अब प्रत्येक नियुक्ति की अलग-अलग जांच की जाएगी और इसके लिए समिति बनाई गई है. कुछ कर्मचारियों को निलंबन से पहले एक महीने का वेतन भी नहीं मिल पाया था.


डॉक्टरों की पदोन्नति भी जांच के घेरे में

यूनिवर्सिटी ने सामान्य पूल में पदोन्नत किए गए करीब दो दर्जन डॉक्टरों को उनके मूल विभागों में वापस भेज दिया है. ये डॉक्टर गुरु गोबिंद सिंह मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में तैनात थे. आरोपों में यह भी शामिल है कि मेडिकल कॉलेज में कुछ ऐसे विभागों के पद बनाए गए, जो वहां मौजूद ही नहीं थे.

पूर्व कुलपति के कार्यकाल में पहले नियुक्त किए गए कुछ कर्मचारियों का वेतन रोके जाने की बात भी सामने आई है. यूनिवर्सिटी प्रबंधन अब नियुक्तियों और पदोन्नतियों से जुड़े रिकॉर्ड की जांच कर रहा है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि किन मामलों में नियमों का पालन हुआ और किन मामलों में प्रक्रिया से हटकर फैसले लिए गए.

पूर्व कुलपति ने कार्रवाई पर उठाए सवाल

पूर्व कुलपति डॉ. राजीव सूद ने प्रबंधन की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए नियुक्तियों का बचाव किया है. उनका कहना है कि उनके कार्यकाल में करीब डेढ़ साल तक प्रबंधन मंडल की बैठक नहीं हुई, लेकिन कार्यकाल खत्म होने के तुरंत बाद नियुक्तियों की समीक्षा के लिए बैठक बुला ली गई.

सूद के अनुसार, नियुक्तियां प्रबंधन मंडल की मंजूरी के बाद हुई थीं और नियुक्ति पत्रों पर दो सदस्यों के हस्ताक्षर भी थे. इनमें फरीदकोट के विधायक गुरदित सिंह सेखों का नाम शामिल है. वहीं, प्रबंधन मंडल के अध्यक्ष डॉ. गुरप्रीत सिंह वांडर ने कहा कि नियुक्तियों और पदोन्नतियों की जांच जारी है. कुछ नियुक्ति पत्र पूर्व कुलपति का कार्यकाल खत्म होने के बाद जारी होने की बात भी सामने आई है.