पंजाब की राजनीति में एक निर्णायक मोड़ तब देखने को मिला जब आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने लुधियाना में नव-निर्वाचित जिला परिषद और ब्लॉक समिति सदस्यों से संवाद किया. इस मौके पर न केवल पंचायत चुनावों में ‘आप’ की ऐतिहासिक जीत को जनता के भरोसे का प्रमाण बताया गया, बल्कि यह भी स्पष्ट किया गया कि पंजाब अब डर, गुंडागर्दी और भ्रष्ट राजनीति के पुराने दौर में वापस नहीं जाएगा.
पंचायत चुनावों में ‘आप’ की ऐतिहासिक जीत
अरविंद केजरीवाल ने पंचायत चुनावों में 70 प्रतिशत से अधिक सीटों पर जीत को जनता की ईमानदार राजनीति के पक्ष में मुहर बताया. उन्होंने कहा कि यह जीत सत्ता के दुरुपयोग से नहीं, बल्कि काम और विश्वास से मिली है. चुनावों में कई सीटों पर बेहद कम अंतर से नतीजे आए, जो पारदर्शिता का प्रमाण हैं. यह दिखाता है कि पंजाब अब निष्पक्ष और लोकतांत्रिक चुनावी संस्कृति की ओर बढ़ चुका है.
केजरीवाल ने कहा कि पहले पंचायत चुनाव सत्ता, डर और जबरदस्ती से जीते जाते थे. बूथ कैप्चरिंग और हिंसा आम बात थी. लेकिन मौजूदा सरकार के कार्यकाल के चार साल बाद हुए चुनावों में कहीं भी जबरदस्ती नहीं हुई. उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि अगर सरकार चाहती तो एक वोट बदलना मुश्किल नहीं था, लेकिन ‘आप’ का मकसद राजनीति को साफ करना है, न कि सत्ता का दुरुपयोग.
‘आप’ प्रमुख ने साफ कहा कि पंजाब में नशों के खिलाफ शुरू की गई जंग राजनीतिक इच्छाशक्ति का परिणाम है. 28 हजार से ज्यादा केस दर्ज हुए हैं और सैकड़ों बड़े तस्कर जेल में हैं. उन्होंने घोषणा की कि अब इसी तर्ज पर गैंगस्टरों के खिलाफ बड़ा अभियान शुरू होगा. सरकार का लक्ष्य है कि पंजाब के हर गैंग और उनके नेटवर्क को जड़ से खत्म किया जाए.
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि सत्ता संभालते समय पंजाब कर्ज में डूबा था और कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं मिलता था. आज हालात बदले हैं. हर महीने समय पर वेतन दिया जा रहा है और सरकारी वित्तीय स्थिति संभाली गई है. उन्होंने इसे ईमानदार शासन का नतीजा बताया और कहा कि एक-एक पैसे की बचत कर जनता पर खर्च किया जा रहा है.
केजरीवाल ने मुफ्त बिजली योजना को सरकार की बड़ी उपलब्धि बताया. उन्होंने कहा कि पहले लोग हजारों रुपये के बिजली बिल लेकर शिकायत करते थे, आज उन्हें जीरो बिल मिल रहा है. पुराने बिल माफ किए गए हैं. उन्होंने कहा कि यह सिर्फ वादा नहीं, बल्कि जमीन पर दिखने वाला बदलाव है, जिसने आम आदमी की जिंदगी आसान की है.
उन्होंने दावा किया कि पंजाब में 60 हजार से ज्यादा सरकारी नौकरियां बिना रिश्वत और सिफारिश के दी गई हैं. शिक्षा और स्वास्थ्य को राजनीति के केंद्र में लाने का श्रेय ‘आप’ को देते हुए उन्होंने कहा कि मोहल्ला क्लीनिक और सरकारी स्कूलों का मॉडल देशभर में चर्चा का विषय बना. उन्होंने चेताया कि दूसरी पार्टियां सत्ता में आईं तो ये सुविधाएं खत्म हो सकती हैं.
नव-निर्वाचित प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए केजरीवाल ने कहा कि अहंकार ने कांग्रेस और अकाली दल को खत्म कर दिया. उन्होंने ‘आप’ नेताओं को चेतावनी दी कि अगर वे घमंड या भ्रष्टाचार में पड़े, तो उनका राजनीतिक जीवन समाप्त हो जाएगा. जनता के बीच रहना, उनकी खुशियों और दुखों में साथ देना ही राजनीति का असली रास्ता है.
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि वे श्री अकाल तख्त साहिब के समक्ष एक विनम्र सिख के रूप में पेश होंगे. उन्होंने कहा कि तख्त साहिब का आदेश उनके लिए सर्वोपरि है और वे हर निर्देश का पालन करेंगे. उन्होंने मांग की कि पूरी प्रक्रिया का सीधा प्रसारण हो, ताकि पारदर्शिता बनी रहे और कोई भ्रम न फैले.
भगवंत मान ने कहा कि ‘आप’ की नीतियों ने पारंपरिक पार्टियों को अपने घोषणा-पत्र बदलने पर मजबूर कर दिया है. उन्होंने अकाली दल और कांग्रेस पर परिवारवाद और डर की राजनीति करने का आरोप लगाया. उनका कहना था कि लोग अब इन दलों की सच्चाई समझ चुके हैं और इसलिए स्थानीय चुनावों में ‘आप’ को भारी समर्थन मिला.
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि मौजूदा 38 प्रतिशत वोट शेयर को 45 प्रतिशत तक ले जाना अगला लक्ष्य है. उन्होंने कहा कि यह जिम्मेदारी जमीनी स्तर के प्रतिनिधियों की है. गांव-गांव जाकर लोगों से जुड़ना होगा. उन्होंने यह भी कहा कि अगला मुख्यमंत्री भी इसी हॉल में बैठा हो सकता है, बशर्ते सेवा और ईमानदारी बनी रहे.
लुधियाना का यह सम्मेलन सिर्फ जीत का जश्न नहीं, बल्कि पंजाब की राजनीति की नई दिशा का संकेत था. ‘आप’ नेतृत्व ने साफ कर दिया कि न डर की राजनीति चलेगी, न भ्रष्टाचार की. नशों और गैंगस्टरों के खिलाफ निर्णायक जंग, पारदर्शी शासन और आम आदमी को केंद्र में रखने वाली राजनीति ही पंजाब का भविष्य तय करेगी.