पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में 30 पद अब भी खाली, सिर्फ 2 नए स्थायी जज मिले
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा ने जस्टिस हरमीत सिंह ग्रेवाल और जस्टिस दीपिंदर सिंह नलवा को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई. केंद्र सरकार ने दोनों न्यायाधीशों की स्थायी नियुक्ति के वारंट जारी किए थे. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम ने पिछले महीने इनकी नियुक्ति को मंजूरी दी थी.
चंडीगढ़: पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में न्यायाधीशों की कमी को दूर करने के लिए एक अहम कदम उठाया गया है. सोमवार को दो अतिरिक्त न्यायाधीशों ने स्थायी न्यायाधीश के रूप में शपथ ली. इसके बावजूद हाई कोर्ट में अभी भी 30 पद खाली हैं और 4.23 लाख से ज्यादा मामले लंबित पड़े हैं.
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा ने जस्टिस हरमीत सिंह ग्रेवाल और जस्टिस दीपिंदर सिंह नलवा को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई. केंद्र सरकार ने दोनों न्यायाधीशों की स्थायी नियुक्ति के वारंट जारी किए थे. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम ने पिछले महीने इनकी नियुक्ति को मंजूरी दी थी.
85 पदों में सिर्फ 55 न्यायाधीश कार्यरत
पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में कुल 85 न्यायाधीशों के पद स्वीकृत हैं. लेकिन फिलहाल केवल 55 न्यायाधीश ही काम कर रहे हैं. यानी करीब एक तिहाई पद अभी भी रिक्त हैं. न्यायाधीशों की इस कमी के कारण मामलों का निपटारा करने में काफी देरी हो रही है. यह हाई कोर्ट देश के सबसे व्यस्त हाई कोर्टों में से एक है. यहां पर आम लोगों, सरकारी कर्मचारियों, व्यवसायियों और किसानों से जुड़े हजारों मामले लंबित हैं. दो नए स्थायी न्यायाधीशों की नियुक्ति से कुछ राहत जरूर मिलेगी, लेकिन समस्या अभी पूरी तरह हल नहीं हुई है.
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10 और नामों को मिली मंजूरी
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने पहले ही 10 नए अधिवक्ताओं के नाम हाई कोर्ट के न्यायाधीश पद के लिए मंजूर कर लिए हैं. इनकी नियुक्ति की अधिसूचना केंद्र सरकार जल्द जारी कर सकती है. इन 10 नियुक्तियों के बाद हाई कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ जाएगी और काम का बोझ कुछ कम होने की उम्मीद है. हालांकि इस साल हाई कोर्ट के तीन न्यायाधीश सेवानिवृत्त होने वाले हैं. ऐसे में रिक्तियों की समस्या बनी रह सकती है.