भारत में सिख गुरुधामों के दर्शन के लिए पाकिस्तान से रवाना हुए 104 श्रद्धालु फैसलाबाद एयरपोर्ट पर फंस गए. श्रद्धालुओं का कहना है कि उनके पास वैध भारतीय वीजा हैं और उन्होंने महंगी हवाई टिकटें भी खरीदी थीं. इसके बावजूद पाकिस्तान की FIA ने उन्हें आगे जाने की अनुमति नहीं दी.
श्रद्धालुओं के मुताबिक, वे पहले वाघा-अटारी बॉर्डर के रास्ते भारत आने वाले थे, लेकिन उन्हें जमीनी रास्ते से यात्रा की अनुमति नहीं मिली. इसके बाद उन्होंने हवाई मार्ग से भारत पहुंचने का फैसला किया और फैसलाबाद से टिकट खरीदी. उनका आरोप है कि एयरपोर्ट पहुंचने के बाद इमीग्रेशन अधिकारियों ने पाकिस्तान सरकार, गृह विभाग और विदेश विभाग की NOC दिखाने को कहा. श्रद्धालुओं का सवाल है कि अगर यह अनुमति जरूरी थी तो इसकी जानकारी उन्हें पहले क्यों नहीं दी गई.
यात्रियों के अनुसार उन्हें रात करीब 10 बजे से सुबह 7 बजे तक एयरपोर्ट पर इंतजार करना पड़ा. यात्रा की मंजूरी नहीं मिलने के बाद जत्थे के कई सदस्य वहीं बैठकर पाठ और गुरु साहिब का जाप करते रहे. श्रद्धालुओं ने बताया कि टिकटों और यात्रा की तैयारी पर काफी पैसा खर्च किया गया था. अब अनुमति नहीं मिलने से टिकट रद्द होने और आर्थिक नुकसान की चिंता भी बनी हुई है.
एयरपोर्ट पर मौजूद एक सिख युवक ने अपना भारतीय वीजा दिखाते हुए इमीग्रेशन व्यवस्था पर सवाल उठाए. उसका कहना था कि यात्रियों को अतिरिक्त NOC की शर्त के बारे में पहले कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई थी. श्रद्धालुओं के अनुसार उनकी यात्रा पूरी तरह धार्मिक थी. उन्हें अमृतसर के श्री हरमंदिर साहिब, श्री हेमकुंड साहिब, दिल्ली के ऐतिहासिक गुरुद्वारों और पंजाब के दूसरे प्रमुख गुरुधामों में दर्शन करने थे.
जत्थे के नेताओं ने भारत के सिख संगठनों और नेताओं से मामले में हस्तक्षेप की अपील की है. उन्होंने ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज, SGPC अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी और दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका से मदद मांगी.
SGPC अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी ने श्रद्धालुओं को रोकने की घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया. उन्होंने कहा कि वैध भारतीय वीजा होने के बाद श्रद्धालुओं को भारत आने की अनुमति मिलनी चाहिए थी. पाकिस्तान की ओर से NOC मांगने के कारणों पर अभी विस्तृत आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है.