क्या जल्द ही समुद्र में समा जाएगा मुंबई शहर? संयुक्त राष्ट्र संघ की रिपोर्ट ने बताया डरावना सच
संयुक्त राष्ट्र (UN) की एक रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि समुद्र का जलस्तर बढ़ने से भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई के समुद्र में डूबने और भारी विस्थापन का खतरा है.
संयुक्त राष्ट्र (UN) की हालिया रिपोर्ट 'चैलेंजेस रिलेटेड टू सी लेवल राइज' के अनुसार, भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई पर समुद्र के बढ़ते जलस्तर के कारण स्थायी रूप से जलमग्न होने और बड़े पैमाने पर आबादी के विस्थापित होने का गंभीर खतरा मंडरा रहा है. 90 से अधिक अरबपतियों, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज और देश के प्रमुख वित्तीय संस्थानों के घर मुंबई के लिए यह एक बेहद चिंताजनक चेतावनी है.
1.4 करोड़ से ज्यादा लोग जोखिम में
यूएन रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिण एशिया के निचले डेल्टा क्षेत्रों में स्थित मुंबई, कोलकाता और ढाका ऐसे शहर हैं जहां समुद्र का स्तर सबसे तेजी से बढ़ रहा है. रिपोर्ट में कहा गया है कि इन तीनों शहरों को मिलाकर 1.4 करोड़ से अधिक आबादी पर अपने घरों को खोने और स्थायी जलभराव का सीधा खतरा है. वर्ष 2014 से 2023 के बीच वैश्विक समुद्र स्तर में औसतन 4.7 मिमी प्रति वर्ष की दर से वृद्धि हुई, जो 2024 में बढ़कर 5.9 मिमी के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई.
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मुंबई के डूबने का मुख्य कारण
ग्लेशियरों के पिघलने और ग्लोबल वार्मिंग के कारण महासागरों के विस्तार को समुद्र का जलस्तर बढ़ने का मुख्य कारण बताया गया है. 2050 तक समुद्र का जलस्तर 0.23 मीटर तक बढ़ सकता है, जबकि 2100 तक यह 1 मीटर से भी अधिक ऊपर जा सकता है. मुंबई के मामले में जमीन का धंसना और मीठे पानी के स्रोतों में खारे पानी का प्रवेश इस समस्या को और अधिक विकराल बना रहा है, जिससे पीने के पानी की सुरक्षा और बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचेगा.
भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा भारी असर
महाराष्ट्र आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, मुंबई का वास्तविक जिला घरेलू उत्पाद (GDDP) 5,32,701 करोड़ रुपए है. देश की वित्तीय सेवाओं, कॉर्पोरेट संचालन, लॉजिस्टिक्स और वैश्विक व्यापार का मुख्य केंद्र होने के कारण, यदि मुंबई में बाढ़ या जलभराव से लंबा व्यवधान आता है, तो इसका सीधा असर न केवल महाराष्ट्र बल्कि पूरी भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा.
विकास योजनाओं के बीच जलवायु परिवर्तन की चुनौती
एक तरफ जहां राज्य सरकार मुंबई को 2047 तक 1.5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने, धारावी पुनर्विकास और 'चौथी मुंबई' (वाधवन पोर्ट) के निर्माण में जुटी है, वहीं दूसरी ओर लगातार बढ़ती भारी बारिश की घटनाएं (132 मिमी से बढ़कर 182 मिमी औसतन) और अरब सागर का बढ़ता तापमान इस क्षेत्र के लिए दोहरी चुनौती पेश कर रहे हैं. यूएन ने इस बड़े खतरे से निपटने के लिए तटीय बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और दीर्घकालिक अनुकूलन योजनाएं बनाने की सख्त सिफारिश की है.