इस स्वतंत्रता दिवस पर दिल्ली में दिखेगा MP का हुनर, राष्ट्रपति भवन में गूंजेगी मालवा निमाड़ की संस्कृति; ट्राइबल आर्ट बढ़ाएगी एट होम की शान
स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्रपति भवन में होने वाले एट होम कार्यक्रम में मध्य प्रदेश की मालवा-निमाड़ संस्कृति, भील और गोंड कला तथा बाघ प्रिंट को खास जगह मिलेगी.
भोपाल: 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति भवन में होने वाले पारंपरिक एट होम कार्यक्रम में मध्य प्रदेश की समृद्ध जनजातीय संस्कृति और लोक कला की खास झलक देखने को मिलेगी. इस बार कार्यक्रम में मालवा-निमाड़ की परंपराओं के साथ भील और गोंड कला को प्रमुखता दी जाएगी.
राष्ट्रपति भवन में आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में देश की विविध सांस्कृतिक विरासत को खास अंदाज में प्रदर्शित किया जाएगा. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की ओर से आयोजित एट होम कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्री, राजनीतिक नेता, राजनयिक, राजदूत और कई विदेशी मेहमान शामिल होंगे. करीब 500 मेहमानों के शामिल होने की संभावना है. कार्यक्रम के लिए राष्ट्रपति भवन को खास तरीके से सजाया जा रहा है.
क्या होगी खासियत?
राष्ट्रपति भवन में मेहमानों की मेज पर मध्य प्रदेश की जनजातीय कला और पारंपरिक शिल्प की झलक देखने को मिलेगी. यहां भील और गोंड कला के रंगों के साथ प्राचीन बाघ प्रिंट की कलाकृतियां भी सजाई जाएंगी. बाघ प्रिंट मध्य प्रदेश की पारंपरिक छपाई कला की पहचान माना जाता है और इसकी डिजाइन में भारतीय शिल्प परंपरा की गहरी छाप दिखाई देती है.
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कार्यक्रम स्थल पर भील समुदाय के घर, गोंड समुदाय के आंगन और आदिवासी विवाह स्थल की झलक भी दिखाई जाएगी. इसके साथ छत्तीसगढ़ की मेटल आर्ट तथा महाराष्ट्र और गोवा की ज्यामितीय कलाकृतियां भी सांस्कृतिक विविधता को दर्शाएंगी.
निमंत्रण पत्र भी बना आकर्षण
राष्ट्रपति भवन के इस खास कार्यक्रम का निमंत्रण पत्र भी अपनी कला और डिजाइन के कारण चर्चा में है. इसकी थीम चार राज्यों छत्तीसगढ़, गोवा, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र की कला परंपराओं से जुड़ी है. इसमें इन राज्यों के पहाड़ी भूभाग, नदियों और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी परंपराओं को भी स्थान दिया गया है.
पूरे निमंत्रण पैकेज को राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान अहमदाबाद ने तैयार किया है. इसमें कला के साथ सतत पर्यावरण और सामुदायिक भागीदारी का संदेश भी दिया गया है. इस तरह स्वतंत्रता दिवस का एट होम कार्यक्रम केवल राष्ट्रीय उत्सव नहीं, बल्कि भारत की विविध जनजातीय और लोक कला को सम्मान देने का अवसर भी बनेगा.