साल में सिर्फ एक बार खुलेंगे नागचंद्रेश्वर के पट, दर्शन को उमड़ेगा भक्तों का सैलाब; जानें ऑनलाइन बुकिंग से लेकर पूरा रूट
नागपंचमी पर उज्जैन के नागचंद्रेश्वर मंदिर के कपाट 16 अगस्त की रात 12 बजे से 17 अगस्त की रात 12 बजे तक 24 घंटे के लिए खुलेंगे. श्रद्धालु 300 रुपये में ऑनलाइन शीघ्र दर्शन की बुकिंग कर सकेंगे.
उज्जैन: उज्जैन में नागपंचमी के अवसर पर भगवान नागचंद्रेश्वर मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए केवल 24 घंटे के लिए खोले जाएंगे. ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर के शीर्ष पर स्थित इस मंदिर के पट रविवार 16 अगस्त की रात 12 बजे खोले जाएंगे.
इसके बाद सोमवार 17 अगस्त की रात 12 बजे तक श्रद्धालु भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन कर सकेंगे. वर्ष में केवल एक बार मंदिर के कपाट खुलने के कारण यहां दर्शन के लिए देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है.
भगवान नागचंद्रेश्वर की प्रतिमा की क्या है खासियत?
भगवान नागचंद्रेश्वर की प्रतिमा को बेहद दुर्लभ माना जाता है. पुराविद डॉ. रमण सोलंकी के अनुसार करीब 350 वर्ष पहले सिंधिया राजवंश द्वारा इस प्रतिमा को नेपाल से उज्जैन लाकर स्थापित कराया गया था. नागपंचमी के दिन भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन और पूजन का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है.
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क्या है पूजा विधि?
मंदिर के कपाट खुलने से पहले महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से त्रिकाल पूजा की जाएगी. इसके बाद सोमवार दोपहर 12 बजे शासन की ओर से विशेष पूजा होगी. शाम 7:30 बजे पुजारी और पुरोहित पूजन करेंगे. रात 12 बजे महानिर्वाणी अखाड़े की पूजा के बाद मंदिर के कपाट फिर बंद कर दिए जाएंगे.
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए क्या की गई है व्यवस्था?
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए सामान्य दर्शन के साथ शीघ्र दर्शन की व्यवस्था भी की गई है. शीघ्र दर्शन के लिए 300 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है. श्रद्धालु श्री महाकालेश्वर मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन बुकिंग कर सकते हैं. 24 घंटे की दर्शन अवधि में 11 अलग अलग समय स्लॉट रखे गए हैं. अग्रिम बुकिंग पहले आओ पहले पाओ के आधार पर होगी और श्रद्धालुओं को अपने निर्धारित स्लॉट के अनुसार दर्शन की सुविधा मिलेगी.
इसबार कब है नागपंचमी का पर्व?
इस बार नागपंचमी का पर्व श्रावण सोमवार के साथ पड़ रहा है. ऐसे में उज्जैन में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटने की संभावना है. भीड़ को नियंत्रित करने और दर्शन व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए महाकाल और नागचंद्रेश्वर दर्शन के लिए अलग अलग मार्ग तय किए गए हैं.
सामान्य दर्शन के लिए श्रद्धालुओं को कर्कराज पार्किंग के प्रवेश द्वार से आगे बढ़ाया जाएगा. इसके बाद भील समाज धर्मशाला, गोंड मोहल्ला, चारधाम, हरसिद्धि चौराहा और बड़ा गणेश होते हुए गेट नंबर 4 से महाकाल मंदिर परिसर में प्रवेश कराया जाएगा. विश्रामधाम से नागचंद्रेश्वर के दर्शन के बाद श्रद्धालुओं को चौबीस खंबा माता मंदिर रोड होते हुए कर्कराज पार्किंग की ओर भेजा जाएगा.