गर्भवती पत्नी की हत्या के बाद भी मिली राहत, हाई कोर्ट ने आखिर क्यों घटा दी सजा ?
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने गर्भवती पत्नी की हत्या के एक मामले में दोषी पति को आंशिक राहत देते हुए उसकी सजा कम कर दी है. अदालत ने माना कि घटना पहले से सुनियोजित नहीं थी और अचानक हुए गंभीर उकसावे में हुई थी.
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने गर्भवती पत्नी की हत्या के एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए दोषी पति की सजा में बदलाव किया है. अदालत ने माना कि यह घटना पहले से सोची समझी नहीं थी, बल्कि अचानक हुए गंभीर उकसावे के कारण हुई. इसी आधार पर अदालत ने हत्या से जुड़ी धारा में बदलाव करते हुए दोषी की सजा घटाकर सात साल की कठोर कैद कर दी. हालांकि अदालत ने उस पर लगाया गया जुर्माना बरकरार रखा है.
यह मामला वर्ष 2021 का है. छिंदवाड़ा जिले के कुलबहेरी नदी क्षेत्र में 18 और 19 की रात एक गर्भवती महिला किरण की मौत हो गई थी. जांच के दौरान अभियोजन पक्ष ने बताया कि महिला के पति शिवा ने खुद ही किरण के रिश्तेदारों को फोन कर घटना की जानकारी दी और कथित रूप से पत्नी की हत्या करने की बात स्वीकार की.
कथित विवाद के बाद हुआ हमला
अभियोजन के अनुसार पति ने बताया कि दोनों के बीच विवाद हुआ था. इसी दौरान पत्नी ने कथित रूप से ऐसा बयान दिया जिससे वह बेहद आहत हो गया. इसके बाद उसने पास में पड़े पत्थर से हमला कर दिया. घटना के समय महिला सात महीने की गर्भवती थी.
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मेडिकल रिपोर्ट में क्या सामने आया
मेडिकल जांच में महिला के शरीर पर कई गंभीर चोटों की पुष्टि हुई. रिपोर्ट के अनुसार पसलियों और छाती की हड्डी में फ्रैक्चर सहित कई चोटों के कारण उसकी मौत हुई. मामले की जांच के दौरान पुलिस ने घटनास्थल से मिले साक्ष्यों को भी फोरेंसिक जांच के लिए भेजा था.
हाई कोर्ट ने किन आधारों पर दी राहत
हाई कोर्ट की खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों से यह साबित नहीं होता कि आरोपी ने पहले से हत्या की योजना बनाई थी. अदालत ने यह भी माना कि आरोपी ने घटना के तुरंत बाद पुलिस और मृतका के परिजनों को इसकी जानकारी दी थी तथा अपराध छिपाने की कोई कोशिश नहीं की.
कोर्ट ने यह भी कहा कि जांच में केवल एक पत्थर बरामद हुआ था और यह स्पष्ट रूप से साबित नहीं हुआ कि महिला पर कई पत्थरों से लगातार हमला किया गया था. अदालत ने यह भी माना कि कुछ चोटें घटनास्थल पर मौजूद अन्य नुकीले पत्थरों के कारण भी हो सकती थीं.
हत्या की धारा में किया बदलाव
इन परिस्थितियों को देखते हुए हाई कोर्ट ने दोषी की सजा का आधार बदल दिया. अदालत ने मामले को भारतीय दंड संहिता की धारा 304 भाग दो के तहत माना, जो ऐसी स्थिति से जुड़ी है जहां मृत्यु का कारण बनने वाला कृत्य तो किया गया हो, लेकिन हत्या का पूर्व नियोजित इरादा सिद्ध नहीं होता. इसके बाद अदालत ने दोषी की सजा घटाकर सात साल की कठोर कैद कर दी. अदालत ने अपने आदेश में कहा कि मामले के तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों को देखते हुए यह घटना गंभीर और अचानक हुए उकसावे का परिणाम प्रतीत होती है. हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि दोषी को अपराध से पूरी तरह राहत नहीं दी जा सकती, इसलिए सजा और जुर्माना दोनों लागू रहेंगे.