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'हाईकोर्ट SC-ST बच्चों को नहीं बनने दे रहा सिविल जज', IAS संतोष वर्मा के विवादित बोल, ब्राहमण बेटी वाले बयान पर भी मचा था बवाल

IAS अधिकारी संतोष वर्मा ने फिर विवाद खड़ा कर दिया है. भोपाल में उन्होंने आरोप लगाया कि हाई कोर्ट SC-ST छात्रों को सिविल जज बनने से रोक रहा है.

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Edited By: Princy Sharma
'हाईकोर्ट SC-ST बच्चों को नहीं बनने दे रहा सिविल जज', IAS संतोष वर्मा के विवादित बोल, ब्राहमण बेटी वाले बयान पर भी मचा था बवाल
Courtesy: Social Media

भोपाल: IAS अधिकारी संतोष वर्मा, जिन्होंने हाल ही में अपने 'तुम कितने संतोष वर्मा मारोगे, हर घर से संतोष वर्मा निकलेगा' वाले बयान से सुर्खियां बटोरी थीं, उन्होंने एक बार फिर एक तीखी बहस छेड़ दी है. भोपाल में एक पब्लिक इवेंट में बोलते हुए, संतोष वर्मा ने खुले तौर पर हाई कोर्ट के कामकाज पर सवाल उठाया और आरोप लगाया कि SC-ST छात्रों को सिविल जज बनने से गलत तरीके से रोका जा रहा है. उनके बयानों से एक बड़ा राजनीतिक और सामाजिक तूफान खड़ा हो गया है.

इवेंट के दौरान, संतोष वर्मा जो AJOAKS के अध्यक्ष भी हैं ने कहा कि SC-ST समुदाय के छात्र कड़ी मेहनत करते हैं, मुश्किल प्रतियोगी परीक्षाएं पास करते हैं और IAS और IPS अधिकारी भी बनते हैं, फिर भी वे बार-बार सिविल जज की परीक्षा पास नहीं कर पाते हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि इस स्थिति के लिए हाई कोर्ट जिम्मेदार है. उनके अनुसार, हाल ही में हुए सिविल जज के चयन में एक भी SC-ST उम्मीदवार शामिल नहीं था और यह निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करता है.

कटऑफ सिस्टम की आलोचना 

संतोष वर्मा ने कटऑफ सिस्टम की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि हाई कोर्ट ने क्वालिफाइंग मार्क्स इतने ऊंचे रखे हैं कि कई काबिल छात्र अपने आप बाहर हो जाते हैं. उन्होंने सवाल किया कि जो SC-ST छात्र दूसरी प्रतियोगी परीक्षाओं में नियमित रूप से 40-50 प्रतिशत अंक लाते हैं, वे अचानक सिविल जज के पद के लिए अयोग्य कैसे हो जाते हैं. उन्होंने दावा किया कि इन उम्मीदवारों को रोकने के लिए जानबूझकर कटऑफ 50 प्रतिशत तय किया गया है.

'यह किस तरह का नियम है...'

उन्होंने इंटरव्यू बोर्ड पर जानबूझकर नंबर कम करने का भी आरोप लगाया और कहा, 'आपने पहले ही तय कर लिया है कि छात्रों को 50 के बजाय 49.95 प्रतिशत अंक मिलने चाहिए. आपने इंटरव्यू के नंबर भी इस तरह से तय किए हैं कि वे कभी भी जरूरी स्कोर तक न पहुंच पाएं. ऐसे सिस्टम में हमारे बच्चे कभी सिविल जज कैसे बनेंगे? यह किस तरह का आरक्षण है? यह किस तरह का नियम है?' वर्मा ने तीखे शब्दों में पूछा और इस बात पर जोर दिया कि ये चिंताएं उसी संस्था हाई कोर्ट से आ रही हैं, जिससे लोग न्याय की उम्मीद करते हैं

कैसे बढ़ा विवाद?

यह विवाद और बढ़ गया क्योंकि ठीक एक दिन पहले, संतोष वर्मा ने भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद की तारीफ करते हुए कहा था, 'हर घर से एक संतोष वर्मा निकलेगा.' इसके जवाब में, SAPAKS महिला विंग ने चेतावनी दी कि अगर ऐसा हुआ, तो हर घर से एक चंडी निकलेगी, जो एक मजबूत जवाबी आंदोलन का संकेत था. लगातार विस्फोटक बयानों के साथ, जाति, आरक्षण और न्यायिक निष्पक्षता पर बहस अब चरम पर पहुंच गई है.