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'चच्चे के 30 बच्चे तो हिंदुओं के...' धीरेंद्र शास्त्री के बयान पर भड़के मुस्लिम स्कॉलर, जताई कड़ी आपत्ति

मध्य प्रदेश के ग्वालियर में बागेश्वर धाम प्रमुख धीरेंद्र शास्त्री के हिंदुओं को चार बच्चे पैदा करने वाले बयान पर विवाद बढ़ गया है. इस पर मुस्लिम स्कॉलर मोहसिन रहमान ने कड़ी आपत्ति जताते हुए बयान को अनुचित बताया.

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Princy Sharma

ग्वालियर: मध्य प्रदेश के ग्वालियर में बागेश्वर धाम प्रमुख पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के हालिया बयान ने एक बार फिर विवाद खड़ा कर दिया है. दरअसल, धीरेंद्र शास्त्री ने हिंदुओं को चार बच्चे पैदा करने की सलाह देते हुए कहा था कि अगर चच्चे के 30 बच्चे हो सकते हैं, तो हिंदुओं के चार क्यों नहीं? संख्या बढ़ेगी तभी खेल बनेगा. इसी बयान पर अब ग्वालियर के मुस्लिम स्कॉलर और मोती मस्जिद के सदर मोहसिन रहमान ने कड़ी आपत्ति दर्ज की है.

धीरेंद्र शास्त्री ने हिंदुओं की घटती जनसंख्या को लेकर कहा था कि देश में 'गजवा-ए-हिंद' जैसी सोच को पनपने नहीं देना चाहिए और हिंदुओं को अपनी संख्या बढ़ानी चाहिए. उन्होंने यहां तक कहा कि अगर हिंदू चार बच्चे पैदा करें तो दो अपने पास रखें, एक देश की सेवा में भेजें और एक बच्चे को साधु-संतों के मार्गदर्शन में देना चाहिए ताकि वह हिंदू राष्ट्र की स्थापना में योगदान दे सके.

मुस्लिम स्कॉलर ने दी तीखी प्रतिक्रिया

बयान सामने आने के बाद मुस्लिम स्कॉलर मोहसिन रहमान ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि किसी समुदाय की आबादी अधिक है तो क्या बाबा उनके घर का संचालन भी करेंगे? उन्होंने सवाल उठाया कि अगर बागेश्वर बाबा सरकार के समर्थन में यह सब कह रहे हैं, तो वे यह भी बताएं कि जनसंख्या बढ़ाने वालों को सरकार क्या सुविधा देगी?

जनसंख्या के आंकड़ों पर उठाए सवाल

मोहसिन रहमान ने धीरेंद्र शास्त्री के आंकड़ों पर भी सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि बाबा के पास मुस्लिम आबादी के सही आंकड़े नहीं हैं. उन्होंने बताया कि 1947 से 1951 के बीच की जनगणना में देश की कुल जनसंख्या लगभग 36 करोड़ थी, जिसमें 30 करोड़ हिंदू थे. ऐसे में, आबादी को लेकर बेबुनियाद तुलना करना समाज में अनावश्यक तनाव बढ़ाता है.

'क्या किसी बाबा, संत...'

उन्होंने यह भी कहा कि क्या किसी बाबा, संत, मस्जिद या गुरुद्वारे में जाकर यह पूछना पड़ेगा कि किसी के घर में कितने बच्चे होने चाहिए? यह पूरी तरह व्यक्तिगत विषय है और धर्म के आधार पर जनसंख्या बढ़ाने की बात समाज में गलत संदेश देती है. धीरेंद्र शास्त्री के इस बयान ने दोनों समुदायों में बहस छेड़ दी है. एक ओर जहां उनके समर्थक इसे 'हिंदू जागरूकता' बता रहे हैं, वहीं विरोधी पक्ष इसे साम्प्रदायिक तनाव भड़काने वाला बयान कह रहे हैं.