सुप्रीम कोर्ट पहुंचा धार भोजशाला विवाद, हाईकोर्ट के फैसले को मुस्लिम पक्ष ने दी चुनौती; आज होगी अहम सुनवाई

मध्य प्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला विवाद पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी. इंदौर हाईकोर्ट के 15 मई के फैसले को चुनौती देते हुए मुस्लिम पक्ष ने याचिका दाखिल की है.

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Shanu Sharma

मध्य प्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला से जुड़ा बहुचर्चित विवाद एक बार फिर से चर्चे में है. इंदौर हाईकोर्ट के 15 मई के फैसले से असहमति जताते हुए मुस्लिम पक्ष ने शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था. जिसके बाद आज इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है.

भोजशाला विवाद से जुड़े मामले में 15 मई को इंदौर हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया था. इस फैसले के बाद मुस्लिम पक्ष ने इसे स्वीकार नहीं किया और सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी. याचिका में हाईकोर्ट के आदेश को निरस्त करने की मांग की गई है. अब देश की सर्वोच्च अदालत इस मामले में दोनों पक्षों की दलीलें सुनकर आगे की प्रक्रिया तय करेगी.

हिन्दू और मुस्लिम पक्ष रखेंगे अपना पक्ष

सुप्रीम कोर्ट में इस मामले में हिन्दू फ्रंट फॉर जस्टिस को मुख्य प्रतिवादी बनाया गया है. संगठन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन अदालत में हिन्दू पक्ष का पक्ष रखेंगे. वह हाईकोर्ट के फैसले का समर्थन करते हुए अपनी दलीलें पेश करेंगे. वहीं, मुस्लिम पक्ष हाईकोर्ट के आदेश पर अपनी आपत्तियां अदालत के समक्ष रखेगा और यह बताने का प्रयास करेगा कि उसके अनुसार उस फैसले में किन आधारों पर पुनर्विचार की आवश्यकता है.


भोजशाला को लेकर हिन्दू और मुस्लिम पक्षों के बीच कई वर्षों से कानूनी विवाद जारी है. हिन्दू पक्ष का कहना है कि भोजशाला माता वाग्देवी का प्राचीन मंदिर है और वहां नियमित पूजा-अर्चना का अधिकार मिलना चाहिए. दूसरी ओर, मुस्लिम पक्ष का दावा है कि यह कमाल मौला मस्जिद है, जहां नमाज अदा करने का अधिकार सुरक्षित रहना चाहिए. इसी अधिकार को लेकर मामला विभिन्न अदालतों में लगातार सुनवाई के दौर से गुजरता रहा है. हर महत्वपूर्ण न्यायिक फैसले के बाद यह विवाद फिर चर्चा का विषय बन जाता है.

सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं निगाहें

आज होने वाली सुनवाई को इस पूरे विवाद में अहम माना जा रहा है. सुप्रीम कोर्ट दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आगे की न्यायिक प्रक्रिया तय करेगा. साथ ही इस बात पर भी नजर रहेगी कि अदालत कोई अंतरिम आदेश जारी करती है या नहीं. भोजशाला विवाद केवल एक धार्मिक स्थल तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका संबंध ऐतिहासिक, कानूनी और सामाजिक पहलुओं से भी जुड़ा हुआ है. ऐसे में सुप्रीम कोर्ट की आगे की कार्यवाही इस बहुचर्चित मामले की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है.