बुटाटी धाम में 22 करोड़ रुपये के कथित गबन का खुलासा, जांच रिपोर्ट में सोना-चांदी के रिकॉर्ड पर गंभीर सवाल
राजस्थान के नागौर स्थित करीब 500 साल पुराने बुटाटी धाम में वित्तीय अनियमितताओं का बड़ा मामला सामने आया है. जिला प्रशासन की जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में 22.74 करोड़ रुपये के कथित गबन का आकलन किया है.
देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में वित्तीय पारदर्शिता को लेकर एक बार फिर सवाल उठे हैं. अयोध्या के श्री राम मंदिर और उत्तराखंड के बद्रीनाथ धाम से जुड़ी चोरी की घटनाओं के बाद अब राजस्थान के नागौर जिले के प्रसिद्ध बुटाटी धाम में करोड़ों रुपये के कथित गबन का मामला सामने आया है.
जिला कलेक्टर के आदेश पर गठित जांच समिति ने मंदिर समिति के वित्तीय दस्तावेज, बैंक लेनदेन, लेखा अभिलेख, वाउचर और अन्य रिकॉर्ड की विस्तृत जांच के बाद अपनी रिपोर्ट प्रशासन को सौंप दी है. रिपोर्ट में मंदिर के आर्थिक प्रबंधन में कई गंभीर अनियमितताओं की ओर संकेत किया गया है.
चढ़ावे, सोना-चांदी और निर्माण कार्यों के रिकॉर्ड पर सवाल
जांच रिपोर्ट के अनुसार मंदिर में चढ़ावे और सोना-चांदी के लेखांकन में भारी विसंगतियां मिली हैं. समिति ने भोजनशाला निर्माण, किराया आय-व्यय और अन्य मदों में भी फंड के कथित दुरुपयोग की बात कही है. रिपोर्ट में बताया गया है कि लगभग 2.60 करोड़ रुपये मूल्य के जेवरों का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं मिला. दानपेटी की आय में प्रशासनिक आकलन और दर्ज आय के बीच करीब 6.40 करोड़ रुपये का अंतर पाया गया. इसके अलावा 2219 रसीद पुस्तिकाओं के गायब होने के कारण लगभग 40 लाख रुपये के नकद गबन की आशंका जताई गई है. जांच में रसोई खर्च में बिना प्रमाणित रिकॉर्ड के करीब 1.17 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी तथा बिना माप पुस्तिका और निविदा प्रक्रिया के लगभग 97 लाख रुपये के मरम्मत एवं निर्माण खर्च का भी उल्लेख किया गया है.
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22.74 करोड़ रुपये का आकलन
समिति ने कुल 146 दिनों तक मामले की जांच की. 23 जून 2026 को सौंपी गई रिपोर्ट में वर्ष 2023-24 और 2024-25 के दौरान 15.16 करोड़ रुपये के प्रमाणित वित्तीय गड़बड़ी का उल्लेख किया गया है. वहीं वर्ष 2025-26 के अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए जाने के कारण प्रतिकूल अनुमान के आधार पर 7.58 करोड़ रुपये जोड़ते हुए कुल 22.74 करोड़ रुपये के कथित गबन का आकलन किया गया है. हालांकि मंदिर समिति ने रिपोर्ट में लगाए गए सभी आरोपों को खारिज करते हुए किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता से इनकार किया है. नागौर का बुटाटी धाम संत श्री चतुरदासजी महाराज से जुड़ा करीब 500 वर्ष पुराना धार्मिक स्थल है.