नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने से दतिया में बगावत, भाजपा जिलाध्यक्ष समेत पूरी जिला कार्यकारिणी ने दिया इस्तीफा
दतिया उपचुनाव में डॉ. नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने से नाराज भाजपा की पूरी जिला कार्यकारिणी ने सामूहिक इस्तीफा दे दिया है और समर्थकों ने हाईवे जाम कर उग्र प्रदर्शन शुरू कर दिया है.
मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर उपचुनाव का बिगुल बजते ही भारतीय जनता पार्टी (BJP) में बगावत का भयंकर ज्वालामुखी फूट पड़ा है. केंद्रीय नेतृत्व द्वारा पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर पूर्व संभागीय संगठन मंत्री आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाए जाने से उनके समर्थक बेहद उग्र हो गए हैं. गुस्से में आए कार्यकर्ताओं ने दतिया में बाजार बंद करा दिए हैं और मुख्य हाईवे पर टायर फूंककर चक्काजाम कर दिया है, जिससे भोपाल से लेकर दिल्ली तक हड़कंप मच गया है.
जिलाध्यक्ष का अल्टीमेटम: नरोत्तम नहीं तो सब साफ
टिकट वितरण से नाराज भाजपा जिलाध्यक्ष रघुवीर सिंह कुशवाह ने प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को पूरी कार्यकारिणी का सामूहिक इस्तीफा भेजकर संगठन की जड़ें हिला दी हैं. इस इस्तीफे में जिला पंचायत अध्यक्ष, नगर पालिका अध्यक्ष, जनपद अध्यक्ष, पार्षदों और सभी 281 बूथ अध्यक्षों के हस्ताक्षर हैं. कुशवाह ने दो टूक शब्दों में कहा है कि केंद्रीय नेतृत्व का यह फैसला एकतरफा है और यदि 24 घंटे के भीतर डॉ. नरोत्तम मिश्रा को प्रत्याशी घोषित नहीं किया गया, तो सभी कार्यकर्ता पार्टी की प्राथमिक सदस्यता भी छोड़ देंगे.
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'आशुतोष तिवारी को कोई नहीं जानता'
हाईवे जाम कर रहे प्रदर्शनकारियों का कहना है कि नरोत्तम मिश्रा ने 15 वर्षों से क्षेत्र का विकास किया है और इस उपचुनाव के लिए रात-दिन मेहनत कर रहे थे. समर्थकों के अनुसार, नए उम्मीदवार आशुतोष तिवारी को जमीन पर कोई नहीं पहचानता. उन्होंने आलाकमान को चेतावनी दी कि जिस तरह भाजपा ने अतीत में बिहार चुनावों के दौरान ऐन वक्त पर अपने फैसले बदले, उसी तरह दतिया में भी प्रत्याशी बदलना होगा, वरना पूरा संभाग ठप कर दिया जाएगा.
सर्वे के बाद बीजेपी ने मिश्रा को किया साइडलाइन
साल 2023 के चुनाव में कांग्रेस के राजेंद्र भारती ने नरोत्तम मिश्रा को मात दी थी. हाल ही में एक पुराने बैंक धोखाधड़ी मामले में दिल्ली की अदालत द्वारा राजेंद्र भारती को 3 साल की सजा सुनाए जाने के बाद उनकी सदस्यता रद्द हो गई, जिससे यहां उपचुनाव की स्थिति बनी. आंतरिक सर्वे और हार के फीडबैक के आधार पर ही आलाकमान ने आशुतोष तिवारी पर दांव खेला है, लेकिन नरोत्तम समर्थकों की इस बगावत ने अब इस त्रिकोणीय दंगल को बेहद पेचीदा और दिलचस्प मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है.