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रैपिडो पर बाइक बुक करने के बाद 'फर्जी ऐप' से ठगी, जानें किस तरह लोगों को चूना लगाते हैं राइडर?

अक्सर लोग एक जगह से दूसरी जगह आने जाने के लिए रैपिडो-उबर जैसे ऐप का इस्तेमाल राइड बुक करने के लिए करते हैं, लेकिन राइड बुक होने के बाद चालक किस तरह से किराये के नाम पर लोगों को चूना लगाते हैं, बेंगलुरु के एक शख्स ने रेडिट पर अपना अनुभव शेयर कर लोगों को आगाह किया है.

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Kanhaiya Kumar Jha

बेंगलुरु: अगर आप भी अकसर एक जगह से दूसरी जगह आने-जाने के लिए रैपिडो या अन्य किसी अन्य ऐप का इस्तेमाल राइड बुक करने के लिए करते हैं, तो यह खबर आपके काम की है. दरअसल, बेंगलुरु के एक व्यक्ति ने रैपिडो पर बुक राइड करने के बाद के अनुभवों को लेकर जो खुलासा किया है, उससे यह साफ़ पता चलता है कि किस तरह लोगों से वाहन चालक ठगी करते हैं.

दरअसल बेंगलुरु के एक व्यक्ति ने दावा किया है कि केम्पेगौड़ा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के टर्मिनल 2 से जक्कुर के लिए रैपिडो बुकिंग में बाइक टैक्सी ऐप ने किराया 598 रुपये दिखाया, लेकिन बुकिंग के बाद जब सवारी खत्म हुई, तो चालक ने अपने फ़ोन पर एक बिलिंग स्क्रीन दिखाई जिस पर 758 रुपये लिखा था.

सबकुछ ठीक, फिर कैसे चला ठगी का पता?

यूजर ने दावा किया कि मैंने सामान्य ओटीपी प्रक्रिया का पालन किया और ड्राइवर को ओटीपी दिया, सब कुछ ठीक लग रहा था, लेकिन सवार द्वारा दिखाई गई स्क्रीन रैपिडो यूआई जैसी दिख रही थी, लेकिन मुझे लगा कि कुछ गड़बड़ है. मैंने अपने फोन पर अपना रैपिडो ऐप चेक किया तो राइड अभी भी अधूरी दिख रही थी.

उपयोगकर्ता ने कहा कि चालक उसे अपना फोन दिखाने में झिझक रहा था, लेकिन उसने किसी तरह जांच की तो पता चला कि वह वास्तव में 'टाउनराइड' नामक एक नकली ऐप का इस्तेमाल कर रहा था. उपयोगकर्ता ने लिखा कि यह बिल्कुल रैपिडो इंटरफेस जैसा दिखता है, लेकिन किराया राशि को मैन्युअल रूप से बदला जा सकता है. जब उससे इस बारे में पूछा गया तो चालक ने बताया कि वह काफी समय से इसका प्रयोग कर रहा है.

सख्ती दिखाने पर बदले चालक के सुर

यूजर ने लिखा कि मुझे एहसास हुआ कि क्या हो रहा है, मैंने सख्ती दिखाई तो वह तुरंत आधिकारिक रैपिडो ऐप पर दिखाई गई वास्तविक राशि स्वीकार करने के लिए तैयार हो गया, भुगतान लिया और तेजी से भाग गया.

सोशल मीडिया पर नेटिजन्स ने बताए अपने-अपने अनुभव

वही, रेडिट पर पोस्ट सामने के बाद नेटिजन्स अपने-अपने अनुभवों को लोगों को साथ शेयर कर रहे हैं. एक अन्य यूजर ने अपने इसी तरह के अनुबह्व लोगों के साथ शेयर करते हुए लिखा कि मेरे साथ भी ऐसा ही हुआ, लेकिन उबर की सवारी के दौरान. एक पल के लिए उसने मुझे बढ़ा हुआ किराया दिखाया और उसे बंद कर दिया. मैं दृढ़ रहा और केवल उतना ही भुगतान करने की पेशकश की जितना मेरे खाते में दिख रहा था.

एक अन्य यूजर ने कहा कि मेरे साथ भी बेंगलुरु में ऐसा ही हुआ. मैं टी1 से जयनगर जा रहा था और मेरा किराया 805 रुपये था. ड्राइवर ने मुझसे पार्किंग शुल्क देने को कहा, जो मैंने मान लिया. लेकिन जब यात्रा पूरी हुई, तो उसने 1100 रुपये मांगे. मैंने उससे पूछा कि यह कैसे संभव है, तो उसने कहा कि प्रतीक्षा और पार्किंग शुल्क 250 रुपये हैं. 

यूजर ने कहा कि पहले तो वह हिंदी और अंग्रेजी में बात कर रहा था, लेकिन अचानक वह कन्नड़ में बोलने लगा, जिससे मैं थोड़ा घबरा गया. मैंने अपने कन्नड़ भाषी दोस्त को फोन किया, और वह आकर उससे बात करने लगा. फिर ड्राइवर ने कहा ठीक है, 850 रुपये दे दो. वे सचमुच लोगों को ठग रहे हैं यार.