बंगलुरु: कर्नाटक में सत्ता संतुलन को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने साफ किया है कि उनके और मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के बीच किसी तरह का मतभेद नहीं है. शनिवार को दोनों नेताओं की नाश्ते पर हुई अहम मुलाकात के बाद सियासी अटकलों ने जोर पकड़ लिया था.
इन चर्चाओं के बीच शिवकुमार ने रविवार को कहा कि पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में वह अपनी सीमाएं जानते हैं और कभी भी उन्होंने मुख्यमंत्री के खिलाफ कोई बयान नहीं दिया है. शिवकुमार ने कहा कि उनके और मुख्यमंत्री के बीच किसी तरह का अंतर नहीं है और दोनों मिलकर काम कर रहे हैं.
#WATCH | Bengaluru | Karnataka DCM DK Shivakumar says, "There is no difference between me and the CM. Being the party president, I know my limits. Nowhere have I made any comments or expressed a difference of opinion with the CM. We are all working together. There are a lot of… pic.twitter.com/kOkLogpGzJ
— ANI (@ANI) November 30, 2025
उन्होंने कहा कि कर्नाटक के लोगों की अनेक उम्मीदें हैं और सरकार उन जरूरतों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है. शिवकुमार ने बताया कि 2028 और 2029 के लिए रणनीति तैयार की जा रही है. सरकार कई मुद्दों पर सभी दलों की बैठक बुलाने की तैयारी में है ताकि राज्य के हित में सामूहिक निर्णय लिया जा सके.
मुख्यमंत्री के आवास पर बंद कमरे में हुई मीटिंग को पार्टी हाईकमान की ओर से दिए गए संकेत का नतीजा बताया जा रहा है. पार्टी के भीतर पावर-शेयरिंग मॉडल पर लंबे समय से चर्चा चल रही है. सूत्रों के अनुसार बैठक में कुछ बातें गतिरोध पर भी पहुंचीं क्योंकि शिवकुमार ने भविष्य में सरकार की बागडोर अपने हाथों में लेने की इच्छा जताई. उन्होंने संगठनात्मक योगदान का हवाला देकर पार्टी नेतृत्व से अवसर देने की मांग रखी.
वहीं सिद्धारमैया ने सुझाव दिया कि 2028 के विधानसभा चुनाव के बाद नेतृत्व परिवर्तन पर विचार किया जा सकता है और किसी भी फैसले पर राहुल गांधी से चर्चा जरूरी होगी. सार्वजनिक रूप से दोनों नेताओं ने मुलाकात को पार्टी और शासन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा बताया और कहा कि मीडिया तथा विपक्ष अफवाहें फैला रहे हैं.
शिवकुमार ने कहा कि पार्टी कठिन दौर से गुजर रही है, लेकिन कर्नाटक कांग्रेस के पुनरुद्धार में बड़ी भूमिका निभाएगा और 2028 में 2023 जैसी जीत दोहराई जाएगी. पार्टी के अंदरुनी सूत्रों के अनुसार केंद्रीय नेतृत्व जनवरी में नेतृत्व परिवर्तन पर समीक्षा कर सकता है. जनवरी में सिद्धारमैया राज्य के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले देवराज उर्स के रिकॉर्ड को पार करेंगे, जिसके चलते अटकलें और तेज होने की संभावना है.