बुधवार को कर्नाटक में सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया औपचारिक रूप से पूरी हो गई. कांग्रेस नेता डीके शिवकुमार ने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर राज्य की कमान संभाल ली. उनके साथ जी परमेश्वर ने उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली. बेंगलुरु स्थित लोक भवन के ग्लास हाउस में आयोजित समारोह में राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने सभी नेताओं को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई. नई सरकार के गठन के साथ कांग्रेस ने राज्य में अपने नेतृत्व और प्रशासनिक एजेंडे को आगे बढ़ाने की शुरुआत कर दी है.
कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री के रूप में डीके शिवकुमार का शपथ ग्रहण राज्य की राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटना माना जा रहा है. कांग्रेस विधायक दल की बैठक में उन्हें सर्वसम्मति से नेता चुना गया था जिसके बाद उनके मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ हो गया. पार्टी के भीतर लंबे समय से संगठन और चुनावी रणनीति में सक्रिय भूमिका निभाने वाले शिवकुमार अब सीधे शासन की जिम्मेदारी संभालेंगे. शपथ ग्रहण समारोह में पार्टी नेताओं, समर्थकों और विभिन्न क्षेत्रों से आए अतिथियों की मौजूदगी ने इस अवसर को विशेष बना दिया. नई सरकार से विकास, प्रशासनिक सुधार और जनहित से जुड़े फैसलों को लेकर अपेक्षाएं भी बढ़ी हैं.
नई सरकार में जी परमेश्वर को उपमुख्यमंत्री बनाया गया है. कांग्रेस नेतृत्व ने उन्हें सरकार के दूसरे सबसे महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारी सौंपी है. परमेश्वर लंबे समय से राज्य की राजनीति में सक्रिय रहे हैं और प्रशासनिक अनुभव भी रखते हैं. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री की यह जोड़ी सरकार को संतुलित तरीके से आगे बढ़ाने में मदद कर सकती है. पार्टी नेतृत्व ने संगठनात्मक अनुभव और राजनीतिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए यह जिम्मेदारी तय की है. इससे सरकार के भीतर समन्वय और निर्णय प्रक्रिया को मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है.
मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के अलावा 12 अन्य नेताओं ने भी मंत्री पद की शपथ ली. इनमें केएच मुनियप्पा, केजे जॉर्ज, यतींद्र सिद्धारमैया, प्रियंक खड़गे, एमबी पाटिल, सतीश जारकीहोली, कृष्णा बायरे गौड़ा, रामलिंगा रेड्डी, यूटी खादर, ईश्वर खंड्रे, बायरथी सुरेश और डॉ. शरण प्रकाश पाटिल शामिल हैं. इन नेताओं को विभिन्न विभागों की जिम्मेदारी मिलने की संभावना है. मंत्रिमंडल में अनुभवी और युवा नेताओं का मिश्रण देखने को मिला है. इससे सरकार प्रशासनिक अनुभव और नई सोच दोनों के साथ काम करने की कोशिश करती नजर आ रही है.
शपथ ग्रहण के साथ ही नई सरकार के सामने कई चुनौतियां और अवसर मौजूद हैं. राज्य के लोगों की नजर अब इस बात पर रहेगी कि सरकार अपने चुनावी वादों को किस गति से लागू करती है. रोजगार, बुनियादी ढांचे, कृषि और सामाजिक कल्याण जैसे मुद्दे सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल रह सकते हैं. कांग्रेस नेतृत्व ने जनता के विश्वास को मजबूत करने और प्रशासन को अधिक प्रभावी बनाने का संकेत दिया है. आने वाले दिनों में मंत्रियों को विभागों का आवंटन और सरकार की कार्ययोजना राज्य की राजनीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी.