बेंगलुरु: बेंगलुरु की एक रहने वाली लड़की ने बताया कि भारी बारिश और जबरदस्त ट्रैफिक जाम के दौरान 15 किलोमीटर की ऑटो-रिक्शा सवारी के लिए उससे 1,200 रुपये वसूले गए, जिससे शहर में 'सर्ज प्राइसिंग' यानी मांग बढ़ने पर कीमतें बढ़ाने को लेकर एक बड़ी बहस छिड़ गई है.
कंटेंट क्रिएटर सान्या सिंह ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो के जरिए इस घटना को शेयर किया और बताया कि कैसे उनकी दोस्त ने इतनी छोटी सी दूरी के लिए कथित तौर पर इतना ज्यादा किराया चुकाया. वीडियो में सान्या सिंह ने इस स्थिति पर हैरानी जताई और कहा कि 15 km की सवारी के लिए यह रकम बहुत ज्यादा लग रही है, जिससे आसानी से रोजमर्रा के खर्च, जैसे कि किराने का सामान खरीदा जा सकता है.
उन्होंने शहर में बारिश के अनुभव पर भी तंज कसा और कहा कि बारिश सुहावनी होने के बजाय अक्सर ट्रैफिक की अफरा-तफरी और शोर को और बढ़ा देती है. उन्होंने आगे कहा कि ऐसी स्थितियों में सवारी बुक करना बहुत मुश्किल लग सकता है और टिप्पणी की कि जहां लोग अपने करियर में संघर्ष कर रहे हैं, वहीं ऑटो ड्राइवर इस बढ़ती मांग का फायदा उठाते दिख रहे हैं.
वह वीडियो में कहती हैं कि इसीलिए मैं बेंगलुरु की बारिश को इतना अच्छा नहीं मान सकती क्योंकि यहां वायलिन की धुन के बजाय आपको सिर्फ हॉर्न की तेज आवाजें सुनाई देती हैं. सवारी बुक करने में कॉलेज में एडमिशन लेने से भी ज्यादा मेहनत लगती है. चाहे हमारा करियर आगे बढ़े या न बढ़े, ये ऑटो ड्राइवर तो पक्का खूब कमाई कर रहे हैं.
वीडियो के साथ यह कैप्शन लिखा था. उसे घर पहुंचने में 3 घंटे लगे. उसने 1200 रुपये सिर्फ इसलिए दिए ताकि ऑटो ड्राइवर उसे बीच रास्ते में छोड़कर न चला जाए. बारिश में ट्रैफिक अपने चरम पर था.
इस वीडियो के बाद ऑनलाइन लोगों की प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई. कई यूजर्स ने इस बात से सहमति जताई कि बेंगलुरु में बारिश के दौरान सफर करना तनावपूर्ण, महंगा और ज्यादा समय लेने वाला हो सकता है. कई लोगों ने कहा कि उन्हें भी पीक आवर्स यानी सबसे ज्यादा भीड़ वाले समय में ऑटो या कैब बुक करने की कोशिश करते समय ऐसी ही चुनौतियों का सामना करना पड़ा है.
कुछ अन्य लोगों ने यह भी बताया कि यात्रियों के पास अक्सर बहुत कम विकल्प होते हैं, खासकर तब जब पब्लिक ट्रांसपोर्ट उनके रास्ते के हिसाब से उपलब्ध नहीं होता. कुछ यूजर्स ने तर्क दिया कि जब ड्राइवरों को लगता है कि यात्रियों को बहुत जल्दी है, तो वे कीमतें बढ़ा देते हैं.