'भगवान श्रीकृष्ण भी पढ़ते थे 5 वक्त की नमाज...' यूपी के इस्लामिक स्कॉलर मौलाना का आपत्तिजनक दावा

उत्तर प्रदेश के इस्लामिक स्कॉलर मौलाना जरजिस अंसारी के एक कथित बयान को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है झारखंड की एक धार्मिक सभा में उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण को लेकर विवादित दावा किया.

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Reepu Kumari

उत्तर प्रदेश के इस्लामिक स्कॉलर मौलाना जरजिस अंसारी का एक कथित बयान सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद नया विवाद खड़ा हो गया है. झारखंड में आयोजित एक धार्मिक सभा के दौरान दिए गए उनके भाषण का वीडियो चर्चा का विषय बना हुआ है. वीडियो में मौलाना भगवान श्रीकृष्ण को लेकर एक विवादित दावा करते नजर आ रहे हैं. उनके बयान के सामने आने के बाद विभिन्न हिंदू धार्मिक और सामाजिक संगठनों ने इसे आस्था से जुड़ा मामला बताते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी है.

धार्मिक सभा में दिया विवादित बयान

झारखंड में आयोजित एक धार्मिक कार्यक्रम के दौरान मौलाना जरजिस अंसारी ने मंच से कहा कि भगवान श्रीकृष्ण भी पांच वक्त की नमाज पढ़ते थे. यह कथित बयान सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया. इसके बाद कई लोगों ने इस पर आपत्ति जताते हुए बयान की आलोचना की.

गीता का हवाला देकर रखा अपना पक्ष

अपने संबोधन के दौरान मौलाना ने अपने दावे के समर्थन में श्रीमद्भगवद्गीता का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि यदि किसी को उनकी बात पर विश्वास न हो तो वह गीता के छठे अध्याय के 10वें श्लोक को देख सकता है. हालांकि, धार्मिक विशेषज्ञों का कहना है कि उक्त श्लोक आत्मसंयम और योग साधना से संबंधित है तथा उसकी इस प्रकार की व्याख्या तथ्यों से मेल नहीं खाती.


सोशल मीडिया पर तेज हुई प्रतिक्रिया

वीडियो वायरल होने के बाद विभिन्न हिंदू धार्मिक और सामाजिक संगठनों ने बयान पर नाराजगी जताई. कई लोगों ने इसे करोड़ों श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं से जुड़ा विषय बताते हुए आपत्ति दर्ज कराई. सोशल मीडिया पर भी इस बयान को लेकर बहस तेज हो गई है.

सीएम योगी आदित्यनाथ पर भी की टिप्पणी

अपने भाषण के दौरान मौलाना जरजिस अंसारी ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का भी उल्लेख किया. उन्होंने मुख्यमंत्री की धार्मिक निष्ठा को लेकर टिप्पणी की, जिसके बाद उनके पूरे भाषण की चर्चा और तेज हो गई.

बयान के बाद बढ़ी सियासी और सामाजिक चर्चा

मौलाना के कथित बयान और उसके वायरल वीडियो ने धार्मिक और सामाजिक स्तर पर नई बहस छेड़ दी है. एक ओर विभिन्न संगठनों ने इस पर आपत्ति जताई है, वहीं सोशल मीडिया पर भी लोग अपने-अपने विचार साझा कर रहे हैं. फिलहाल यह मामला लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है.