menu-icon
India Daily

सिर्फ बच्चे ही नहीं, माता-पिता भी जाएंगे स्कूल; झारखंड से जिले में 'साक्षर भारत' को लेकर नई पहल

सरकारी स्कूलों में नए सत्र 2026-27 से निरक्षर अभिभावकों के लिए विशेष कक्षाएं शुरू होंगी. साक्षर भारत एवं हुलास कार्यक्रम के तहत रोजाना एक घंटे बुनियादी अक्षर ज्ञान और गणित सिखाया जाएगा.

princy
Edited By: Princy Sharma
सिर्फ बच्चे ही नहीं, माता-पिता भी जाएंगे स्कूल; झारखंड से जिले में 'साक्षर भारत' को लेकर नई पहल
Courtesy: Pinterest

जमशेदपुर : झारखंड में जमशेदपुर जिले के सरकारी स्कूल जल्द ही न सिर्फ छात्रों के लिए बल्कि उनके माता-पिता के लिए भी रेगुलर क्लास शुरू करेंगे. नए एकेडमिक सेशन 2026-27 से, स्कूल जाने वाले बच्चों के माता-पिता 'साक्षर भारत' और 'हुलास' कार्यक्रमों के तहत स्कूल परिसर में रोजाना क्लास अटेंड करेंगे. इस पहल का मकसद निरक्षरता को कम करना और शिक्षा और परिवारों के बीच रिश्ते को मजबूत करना है.

प्लान के मुताबिक, माता-पिता की क्लास सोमवार से शनिवार तक रोजाना एक घंटे के लिए होंगी. टीचर रेगुलर स्कूल के घंटों के दौरान माता-पिता को पढ़ाएंगे, जबकि छात्र अपनी क्लास अटेंड करेंगे. माता-पिता के लिए अलग क्लासरूम की व्यवस्था की जाएगी ताकि दोनों सीखने की प्रक्रियाएं एक ही समय पर आसानी से चल सकें.

गाइडलाइंस में क्या है?

इस योजना को लागू करने के लिए, टीचरों ने पहले ही अपने-अपने स्कूल के इलाकों में निरक्षर माता-पिता की लिस्ट बनाना शुरू कर दिया है. रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया के दौरान, टीचर ऐसे माता-पिता की पहचान कर रहे हैं जो पढ़ या लिख ​​नहीं सकते. गाइडलाइंस के तहत, हर स्कूल को कम से कम 15 ऐसे माता-पिता की पहचान करनी होगी. इन माता-पिता को नए सेशन से रेगुलर क्लास में एडमिशन लेने और अटेंड करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा.

क्लास में क्या सिखाया जाएगा?

इन खास क्लास में, माता-पिता को बेसिक साक्षरता कौशल सिखाए जाएंगे. ध्यान अपना नाम लिखना, दस्तावेजों पर साइन करना और बेसिक गणित समझने पर होगा. जोड़, घटाव, गुणा और भाग जैसी आसान गणित की अवधारणाएं सिखाई जाएंगी ताकि माता-पिता रोजमर्रा के कामों को आत्मविश्वास से कर सकें.

खास बात यह है कि यह कार्यक्रम सिर्फ माताओं तक ही सीमित नहीं है. इसमें पिता को भी शामिल किया जाएगा, जिससे पुरुषों और महिलाओं दोनों की बराबर भागीदारी सुनिश्चित होगी. टीचरों को स्कूल के घंटों के दौरान ये क्लास चलाने और माता-पिता की सीखने की प्रगति पर नजर रखने की जिम्मेदारी दी गई है.

माता-पिता के लिए परीक्षा

कार्यक्रम की प्रभावशीलता को मापने के लिए समय-समय पर माता-पिता के लिए परीक्षाएं आयोजित की जाएंगी. उनकी सीखने की प्रगति का मूल्यांकन किया जाएगा और फीडबैक का इस्तेमाल पढ़ाने के तरीकों को बेहतर बनाने के लिए किया जाएगा. एकेडमिक सेशन के आखिर में, एक फाइनल परीक्षा होगी. अच्छा प्रदर्शन करने वाले माता-पिता को दूसरों को प्रेरित करने के लिए पुरस्कृत और सम्मानित किया जाएगा.

यह कार्यक्रम जमशेदपुर जिले के सभी सरकारी प्राइमरी, मिडिल और हाई स्कूलों में लागू किया जाएगा. छात्रों की सालाना परीक्षा के बाद माता-पिता की क्लास शुरू होंगी, और रेगुलर पढ़ाई अप्रैल 2026 में नए एकेडमिक सेशन के साथ शुरू होगी. उम्मीद है कि यह पहल परिवारों को सशक्त बनाएगी और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मजबूत सीखने का माहौल बनाएगी.