जमशेदपुर: 13 जनवरी को जमशेदपुर में कैरव गांधी का अपहरण हुआ था. पुलिस जांच में सामने आया कि यह सुनियोजित अपराध था. गिरोह ने फर्जी पुलिस वर्दी और नकली डीआईजी की भूमिका निभाई. उद्योगपति को गयाजी के बिसर गांव में छिपाकर रखा गया. मुख्य आरोपी फरार है, लेकिन उसका पंजाब, बिहार, दिल्ली और कोलकाता तक नेटवर्क फैला हुआ है. एसएसपी ने बताया कि गिरोह रईसजादों की तस्वीरें खींचकर उनके नंबर हासिल करता और उगाही करता था.
74 वर्षीय अमरिंदर सिंह उर्फ करतार सिंह, जो लुधियाना का हवाला कारोबारी है, ने नकली डीआईजी बनकर कैरव को रोका. वह पुलिस वर्दी में रास्ते भर बात करता रहा ताकि कोई शक न करे. उसके खिलाफ पंजाब में भी केस दर्ज है. मनप्रीत सिंह ने चालक की भूमिका निभाई. अन्य आरोपी गुड्डू, इमरान और रमीज भी शामिल थे. साकची में फर्जी आधार से कमरा लेकर साजिश रची गई.
मुख्य सरगना छह महीने पहले अमरिंदर के साथ जमशेदपुर आया था. वह बड़े होटलों में पार्टियों में शामिल होकर अमीरों की तस्वीरें लेता और नंबर हासिल करता था. कई बार फोटो भेजकर अपहरण की धमकी देकर उगाही करता था. गिरोह ने सदस्यों की पहचान सीमित रखी ताकि पूरा नेटवर्क न पकड़ा जाए. कनाडा और नीदरलैंड से भी उसके संपर्क थे.
अपराधियों ने स्कॉर्पियो में कैरव को बैठाया और चांडिल गोलचक्कर ले गए. वहां दूसरे वाहन में शिफ्ट किया. रांची होते हुए डोभी और फिर गयाजी के बिसर गांव पहुंचाए. पहले 7 लोग गिरफ्तार हो चुके हैं. अब चार और पकड़े गए हैं. राजकरण यादव, संतोष कुमार और गुरदीत शेर सिंह भी सहयोगी थे. पुलिस ने सिटी एसपी और डीएसपी के साथ प्रेस में जानकारी साझा की.
एक अलग मामले में बर्मामाइंस सब स्टेशन से लाखों की लूट में पुलिस ने चार संदिग्धों को हिरासत में लिया है. 18 फरवरी को 10-12 बदमाश हथियारों से लैस होकर घुसे थे. गार्डों को बंधक बनाकर कॉपर, एल्युमिनियम केबल और अन्य सामग्री लूटी. टाटा स्टील की शिकायत पर केस दर्ज है. पूछताछ जारी है.