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झारखंड में हाथियों का कहर, 4 मजदूरों को कुचला; तीन की दर्दनाक मौत एक की हालत बेहद गंंभीर

झारखंड के रामगढ़ में हाथियों के हमले में तीन मजदूरों की मौत हो गई और एक गंभीर रूप से घायल है. घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल है.

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Km Jaya

रामगढ़: झारखंड के रामगढ़ जिले में शुक्रवार सुबह हाथियों के हमले ने दहशत फैला दी. गोला और मुरपा इलाके में जंगली हाथियों ने चार मजदूरों पर हमला कर दिया, जिसमें तीन की मौके पर ही मौत हो गई जबकि एक मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गया.

जानकारी के अनुसार यह घटना सुबह उस समय हुई जब मजदूर अपने काम में लगे हुए थे. अचानक हाथियों का झुंड वहां पहुंचा और मजदूरों को निशाना बना लिया. हमले में मजदूरों को कुचल दिया गया, जिससे तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो गई.

किन-किन लोगों की हुई मौत?

मृतकों की पहचान पतरातू के तालाटांड निवासी धीरज भुइंया, कुजू के युगल भुइंया और मुरपा गांव के श्यामदेव के रूप में हुई है. श्यामदेव की उम्र करीब 70 साल बताई जा रही है, जबकि अन्य दो मजदूर अपेक्षाकृत कम उम्र के थे.

घटना में एक अन्य मजदूर गंभीर रूप से घायल हुआ है, जिसे तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया है. घायल मजदूर सुतरी गांव का निवासी बताया जा रहा है और उसकी हालत नाजुक बनी हुई है.

स्थानीय लोगों ने क्या बताया?

स्थानीय लोगों के अनुसार सभी मजदूर ईंट बनाने के काम के लिए इस इलाके में आए थे. इसी दौरान हाथियों का झुंड वहां पहुंच गया और अचानक हमला कर दिया. हमले की घटना इतनी तेजी से हुई कि मजदूरों को संभलने का मौका नहीं मिला.

वन विभाग ने क्या लिया एक्शन?

इस घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल है. ग्रामीणों में डर बना हुआ है और लोग घरों से बाहर निकलने से बच रहे हैं. वन विभाग और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंच गई है और हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है.

विशेषज्ञों का कहना है कि जंगलों के क्षेत्र में कमी और मानव गतिविधियों के बढ़ने के कारण हाथियों और इंसानों के बीच टकराव की घटनाएं बढ़ रही हैं. इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है.

प्रशासन ने क्या की है अपील?

प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है और जंगल के आसपास के इलाकों में अनावश्यक रूप से जाने से मना किया है. साथ ही प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता देने का आश्वासन भी दिया गया है.

लगातार बढ़ रही इस तरह की घटनाओं ने वन्यजीव और मानव के बीच संतुलन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. स्थानीय प्रशासन अब इस दिशा में स्थायी समाधान तलाशने की कोशिश में जुट गया है.