अस्पताल के कर्मचारी ने 7 साल के बच्चे को चढ़ा दिया HIV संक्रमित खून, पिता ने लगाया बदले का आरोप
चाईबासा के सदर अस्पताल में सात साल के थैलेसीमिया पीड़ित बच्चे को ब्लड बैंक कर्मी द्वारा एचआईवी संक्रमित खून चढ़ाने का आरोप सामने आया है. स्वास्थ्य विभाग ने जांच शुरू कर दी है। कर्मचारी ने आरोपों से इनकार किया है.
चाईबासा: झारखंड के चाईबासा जिले में सरकारी अस्पताल की गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है. यहां के सदर अस्पताल के ब्लड बैंक में सात साल के थैलेसीमिया पीड़ित बच्चे को एचआईवी संक्रमित खून चढ़ा दिया गया. इस घटना से वहां की स्वास्थ व्यवस्था पर सवाल उठने लगे. बच्चे के पिता ने जांच रिपोर्ट के साथ उपायुक्त से शिकायत कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है.
मिली जानकारी के मुताबिक मंझारी निवासी सात साल का बच्चा थैलेसीमिया से पीड़ित है. उसे हर माह चाईबासा सदर अस्पताल से खून चढ़ाया जाता है. पिता का आरोप है कि अस्पताल के ब्लड बैंक कर्मचारी मनोज कुमार ने जानबूझकर बच्चे को संक्रमित रक्त दिया. पिता का कहना है कि पिछले साल नवंबर में इसी कर्मचारी के दुर्व्यवहार के मामले में रिपोर्ट दर्ज कराई थी, जो फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन है. पिता का कहना है कि यह बदला लेने की कोशिश है.
माता-पिता के जांच रिपोर्ट में क्या आया?
परिवार का कहना है कि 18 अक्टूबर को बच्चे की ब्लड जांच रिपोर्ट एचआईवी पॉजिटिव आई थी. इसके बाद माता-पिता ने अपनी जांच कराई, जिसमें दोनों एचआईवी नेगेटिव पाए गए. जिससे ये पता चलता है कि सिर्फ बच्चे में पॉजिटिव है और ये एचआईवी वाले ब्लड से ही हुआ है. इस रिपोर्ट को लेकर परिजन उपायुक्त से मिले और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की.
कर्मचारी ने क्यों किया आरोपों से इंकार?
वहीं ब्लड बैंक कर्मचारी मनोज कुमार ने सभी आरोपों से साफ इंकार किया है. उसका कहना है कहा कि ब्लड बैंक में बिना जांच के रक्त जारी नहीं किया जाता है और ब्लड बैंक में हर यूनिट का रिकॉर्ड सुरक्षित रहता है. जिसके वजह से ब्लड बैंक कर्मचारी ने खुद पर लगे आरोपों को झूठा बताया और कहा कि उसे फंसाने की कोशिश की जा रही है.
दोषी पर कड़ी कार्रवाई की मांग
मंझारी जिला परिषद सदस्य माधव चंद्र ने कहा कि यह बेहद गंभीर मामला है. दोषी पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए और प्रशासन को बच्चे के इलाज की पूरी व्यवस्था करनी चाहिए. मामले की जांच के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीम बनाई जा रही है. इस घटना ने राज्य के स्वास्थ्य व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं.