'अंतिम संस्कार अच्छे से करा देना...' सोनीपत का अभागा पिता, 3 बेटियों का करते रहे इंतजार; अस्थि विसर्जन भी किसी और ने किया

हरियाणा के सोनीपत से एक बुजुर्ग पिता की मार्मिक कहानी सामने आई है. कपड़ा कारोबारी शिवचरण गुप्ता की मृत्यु के बाद उनकी तीनों बेटियां अंतिम संस्कार में नहीं पहुंचीं.

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Reepu Kumari

सोनीपत: हरियाणा के सोनीपत से सामने आई एक घटना ने पारिवारिक रिश्तों को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं. कपड़ा कारोबारी शिवचरण गुप्ता की मृत्यु के बाद उनकी अंतिम विदाई में परिवार का कोई सदस्य मौजूद नहीं था. वृद्धाश्रम प्रशासन ने उनके अंतिम संस्कार से लेकर आगे की सभी व्यवस्थाएं पूरी कीं. यह मामला अब लोगों के बीच भावनात्मक चर्चा का विषय बना हुआ है. जानकारी के अनुसार, शिवचरण गुप्ता ने अपनी तीनों बेटियों को पढ़ाकर आत्मनिर्भर बनाया था. पत्नी के निधन के बाद वह पिछले करीब डेढ़ वर्ष से सोनीपत के एक वृद्धाश्रम में रह रहे थे. बीमारी के दौरान वृद्धाश्रम की ओर से बेटियों को सूचना भी दी गई, लेकिन कथित तौर पर कोई भी पिता से मिलने नहीं पहुंचा.

बीमारी की सूचना के बाद भी नहीं पहुंचा परिवार

वृद्धाश्रम संचालक के मुताबिक, लगभग 20 दिन पहले शिवचरण गुप्ता की तबीयत बिगड़ने की जानकारी उनकी बेटियों को दी गई थी. इसके बावजूद वे उनसे मिलने नहीं आईं. संचालक का कहना है कि पहले शिवचरण गुप्ता नियमित रूप से बेटियों से फोन पर बात करते थे, लेकिन बीमारी के दौरान उनके पास फोन आना भी बंद हो गया था.

अंतिम संस्कार में शामिल होने के बजाय वीडियो कॉल का सहारा

वृद्धाश्रम प्रशासन ने बताया कि मृत्यु के बाद भी परिजनों को सूचना देकर कहा गया था कि यदि वे आ रहे हैं तो शव को सुरक्षित रखा जा सकता है. हालांकि, कथित तौर पर समय की कमी का हवाला देते हुए कोई भी अंतिम संस्कार में नहीं पहुंचा. इसके बाद अंतिम संस्कार की पूरी प्रक्रिया वीडियो कॉल के माध्यम से दिखाई गई.


₹5100 भेजकर अंतिम संस्कार की व्यवस्था करने को कहा

वृद्धाश्रम के अनुसार, बड़ी बेटी ने ऑनलाइन 5100 रुपये भेजे और अनुरोध किया कि पिता का अंतिम संस्कार पूरी विधि-विधान से कराया जाए. अंतिम संस्कार के बाद वीडियो कॉल के जरिए पूरी प्रक्रिया देखी गई. साथ ही अंतिम संस्कार से जुड़े वीडियो भी भेजने के लिए कहा गया.

अस्थि विसर्जन की जिम्मेदारी भी वृद्धाश्रम को मिली

शुरुआत में परिजनों ने अस्थियां सुरक्षित रखने की बात कही थी, लेकिन बाद में कथित तौर पर समय न होने का कारण बताते हुए गंगा में अस्थि विसर्जन की जिम्मेदारी भी वृद्धाश्रम को ही सौंप दी. इसके बाद आश्रम प्रशासन ने आगे की धार्मिक प्रक्रिया पूरी करने की तैयारी की.

घटना ने रिश्तों को लेकर छेड़ी नई बहस

यह मामला केवल एक परिवार की कहानी नहीं, बल्कि बदलते सामाजिक और पारिवारिक संबंधों पर भी चर्चा छेड़ रहा है. जिस पिता ने जीवनभर परिवार की जिम्मेदारियां निभाईं, उनकी अंतिम विदाई की जिम्मेदारी वृद्धाश्रम को उठानी पड़ी. इस घटना ने समाज में बुजुर्गों की देखभाल और पारिवारिक जिम्मेदारियों को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं.