IPS अधिकारी वाई पूरन कुमार ने क्यों की आत्महत्या? अब SIT करेगी जांच, इन अधिकारियों को मिली सबूत खंगालने की जिम्मेदारी

गौरतलब है कि हरियाणा कैडर के 2001 बैच के अधिकारी पूरन कुमार चंडीगढ़ के सेक्टर 11 स्थित अपने घर में गोली मरकर आत्महत्या कर ली थी. उन्होंने एक कथित सुसाइड नोट भी छोड़ा है।

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Kanhaiya Kumar Jha

IPS officer Y Puran Kumar Suicide Case: हरियाणा के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजीपी) वाई पूरन कुमार ने मंगलवार को चंडीगढ़ स्थित अपने आवास पर कथित तौर पर गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी, जिसके बाद से एक तरफ जहां पुलिस महकमें में हड़कंप मचा हुआ है, वही राजनीतिक बयानबाज़ी भी जारी है और विपक्ष इस मुद्दे को लेकर राज्य की बीजेपी सरकार पर निशाना साध रही है. वही अब इस मामले में चंडीगढ़ पुलिस ने एक SIT टीम का गठन किया है. अब ये टीम आईपीएस अधिकारी वाई पूरन कुमार केस की जांच करेगी.

दरअसल, आईजीपी चंडीगढ़ पुष्पेंद्र कुमार की अध्यक्षता में SIT टीम का गठन किया गया है. वहीं आईपीएस कंवरदीप कौर, आईपीएस केएम प्रियंका, डीएसपी चरणजीत सिंह विर्क, एसडीओपी गुरजीत कौर और इंस्पेक्टर जयवीर सिंह राणा भी इस टीम में शामिल है. बता दें कि वाई पूरन कुमार के सुसाइड नोट में वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा उन्हें प्रताड़ित करने की बात कही गई है, जिसको लेकर अब SIT पुरे मामले की जांच करेगी. 

IPS अधिकारी ने अपने सुसाइड नोट में कई अधिकारियों पर लगाए हैं गंभीर आरोप 

गौरतलब है कि हरियाणा कैडर के 2001 बैच के अधिकारी पूरन कुमार चंडीगढ़ के सेक्टर 11 स्थित अपने घर में गोली मरकर आत्महत्या कर ली थी. उन्होंने एक कथित सुसाइड नोट भी छोड़ा है. उनकी पत्नी और आईएएस अधिकारी अमनीत पी. ​​कुमार ने बुधवार को राज्य के डीजीपी शत्रुजीत सिंह कपूर और रोहतक के एसपी नरेंद्र बिजारनिया के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसमें उन पर जाति आधारित भेदभाव और आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया गया. उन्होंने आरोप लगाया कि डीजीपी हरियाणा शत्रुजीत सिंह कपूर के निर्देश पर उन्हें झूठे सबूतों के आधार पर शिकायत में फंसाने की साजिश रची जा रही है.

एडीजीपी रैंक से आईजी रैंक में प्रमोट हुए थे वाई पूरन कुमार

बता दें कि आईजी वाई पूरन कुमार बीते डेढ़ वर्ष से काफी सूर्खियों में थे. उन्हें एडीजीपी रैंक से आईजी रैंक में प्रमोट किया गया था. आईजी वाई पूरन कुमार ने पिछले वर्ष वन ऑफिसर वन हाउस पॉलिसी के तहत शिकायत दी थी और प्रदेश के कई अफसरों की शिकायत की थी, इस वजह से वह सूर्खियों में आए थे. उन्होंने आरोप लगाया था कि कई आईपीएस अफसरों ने एक से ज्यादा सरकारी आवास ले रखे हैं. इसके अलावा उन्होंने पूर्व डीजीपी और एडिशनल चीफ सेक्रेटरी पर भी जाति के आधार पर भेदभाव करने की शिकायत आयोग से की थी.