सिरसा: हरियाणा के सिरसा जिले से एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है. जहां जिला जेल सिरसा में तैनात वार्डन सुखदेव सिंह ने जहरीला पदार्थ खाकर आत्महत्या कर ली. यह घटना गुरुवार एक जनवरी की शाम की बताई जा रही है. आत्महत्या से पहले वार्डन ने दो सुसाइड नोट छोड़े, जिनमें जेल के डीएसपी और एक अन्य अधिकारी पर मानसिक प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए गए हैं.
परिजनों के अनुसार, सुखदेव सिंह पिछले कई वर्षों से दिल की बीमारी से पीड़ित थे. उनके दिल में दो स्टेंट लगे हुए थे. जिसकी वजह से उन्होंने 14 दिसंबर को पुलिस उप अधीक्षक सिक्योरिटी से रात की ड्यूटी न लगाने का अनुरोध किया था. आरोप है कि इस बात पर अधिकारी नाराज हो गए और इसके बाद लगातार उन्हें मानसिक रूप से परेशान किया जाने लगा.
सुसाइड नोट में सुखदेव सिंह ने लिखा है कि बीते पंद्रह दिनों से उन्हें ड्यूटी टाइमिंग को लेकर प्रताड़ित किया जा रहा था. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनसे सार्वजनिक रूप से माफी मंगवाई गई और पूरे दिन ड्यूटी में खड़ा रखा गया. उन्होंने अपनी मौत के लिए सीधे तौर पर डीएसपी और एलओ को जिम्मेदार ठहराया है.
गुरुवार शाम सुखदेव सिंह ने अपने घर पर सल्फास खा लिया. हालत बिगड़ने पर परिवार के लोग उन्हें सिविल अस्पताल ले गए. वहां से गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें एक निजी अस्पताल रेफर किया गया लेकिन रात के समय इलाज के दौरान ही उनकी मौत हो गई. सूचना मिलने के बाद जेल प्रशासन के अधिकारी भी अस्पताल पहुंचे.
आत्महत्या से पहले सुखदेव सिंह ने अपने बेटे जसपाल सिंह को फोन किया. उन्होंने बेटे को बताया कि अधिकारियों की प्रताड़ना से तंग आकर वह जहर खा रहे हैं. उन्होंने कहा कि उनके बैग में सुसाइड नोट रखा है, जिसे जेल महानिदेशक और जेल सुपरिंटेंडेंट के नाम लिखा गया है. फोन पर उन्होंने अपने परिवार का ख्याल रखने की बात कही.
मृतक के बेटे और पिता ने आरोप लगाया कि उनके साथ लगातार दुर्व्यवहार किया जा रहा था. परिवार का दावा है कि जातिसूचक शब्दों का भी इस्तेमाल किया गया, जिससे सुखदेव सिंह पूरी तरह टूट गए. परिजनों ने हुडा पुलिस चौकी में डीएसपी समेत दो अधिकारियों के खिलाफ शिकायत दी है.
परिवार ने साफ कहा है कि जब तक आरोपित अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई नहीं होती, तब तक वे शव नहीं लेंगे. फिलहाल हुडा पुलिस चौकी ने सुसाइड नोट के आधार पर जांच शुरू कर दी है.