भंडारे से लेकर प्रसाद की दुकान तक... नहीं दिखेगा कचरे का ढेर, मंदिरों-तीर्थों के 500 मीटर का बनेगा सफाई जोन
हरियाणा के प्रमुख मंदिरों और तीर्थ स्थलों पर सफाई व्यवस्था को मजबूत करने के लिए 500 मीटर का विशेष सफाई जोन बनाया जाएगा. पहले चरण में मनसा देवी मंदिर, शीतला माता मंदिर और ब्रह्मसरोवर को शामिल किया गया है.
हरियाणा के प्रमुख मंदिरों, तीर्थ स्थलों और पर्यटन स्थलों पर सफाई की एक नई योजना लागू की जा रही है. सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद राज्य सरकार ने साल भर चलने वाली सफाई की एक खास रणनीति बनाई है. पहले चरण में पंचकूला का मनसा देवी मंदिर, गुरुग्राम का शीतला माता मंदिर और कुरुक्षेत्र का ब्रह्म सरोवर शामिल हैं.
हर धार्मिक स्थल के आस-पास 500 मीटर के दायरे में एक खास सफाई जोन बनाया जाएगा. इस जोन में आने-जाने के रास्ते, पार्किंग एरिया, दुकानें और आस-पास के इलाके शामिल होंगे. खुले में कचरा फेंकने पर रोक होगी और सफाई की निगरानी बढ़ाई जाएगी.
हर 50 मीटर पर चार तरह के डस्टबिन
मुख्य रास्तों पर हर 50 मीटर पर और जहां श्रद्धालु लाइन में लगते हैं, वहां हर 25 मीटर पर चार तरह के डस्टबिन लगाए जाएंगे. इनमें गीले कचरे, सूखे कचरे, सैनिटरी कचरे और खास तरह के कचरे के लिए अलग-अलग डिब्बे होंगे. ज्यादा भीड़-भाड़ वाले समय में कचरा जमा होने से रोकने के लिए अतिरिक्त सफाई कर्मचारी और कचरा उठाने वाली गाड़ियां तैनात की जाएंगी.
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नदियों या तालाबों में फूल फेंकने पर रोक
मंदिरों और घाटों पर फूल और पूजा-पाठ की सामग्री के लिए खास डिब्बे रखे जाएंगे. श्रद्धालुओं को नदियों, तालाबों या अन्य जल निकायों में फूल या पूजा-पाठ का कचरा फेंकने की इजाजत नहीं होगी. इसके बाद राज्य के अन्य प्रमुख तीर्थ और पर्यटन स्थलों की पहचान की जाएगी और उन्हें सफाई के इस खास ढांचे के तहत लाया जाएगा.
हर 100 लोगों के लिए एक शौचालय
लक्ष्य यह है कि बड़े धार्मिक आयोजनों के दौरान हर 100 लोगों के लिए कम से कम एक शौचालय सीट हो और इनमें से कम से कम 50 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हों. जरूरत पड़ने पर बड़े मेलों में मोबाइल शौचालय भी लगाए जाएंगे. गंदे पानी और गाद को तय सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट तक ले जाना जरूरी होगा.
सामुदायिक रसोई और प्रसाद स्टॉल पर ध्यान
500 मीटर के स्वच्छता क्षेत्र में आने वाली सामुदायिक रसोई, प्रसाद स्टॉल, धर्मशालाएं, होटल और सड़क किनारे बने भोजनालय (ढाबे) 'बल्क वेस्ट जेनरेटर' (बड़ी मात्रा में कचरा पैदा करने वाले) माने जाएंगे. उन्हें कचरे को अलग-अलग करना होगा और अपने डस्टबिन लगाने होंगे.
इन जगहों पर सिंगल-यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल न करने के निर्देश जारी किए जाएंगे. नियमों का उल्लंघन करने पर जुर्माना लग सकता है, सिक्योरिटी डिपॉजिट जब्त हो सकता है या काम करने की इजाजत भी रद्द हो सकती है. जरूरत पड़ने पर पानी और बिजली के अस्थायी कनेक्शन भी काटे जा सकते हैं.
24 घंटे के अंदर कचरा हटाना जरूरी
मकसद तीर्थयात्रा वाले इलाके को सिंगल-यूज प्लास्टिक से मुक्त बनाना है. किसी भी कार्यक्रम के खत्म होने के 24 घंटे के अंदर सारा कचरा हटाना होगा. इसके अलावा एक किलोमीटर के दायरे में पान और तंबाकू के दाग-धब्बों के साथ-साथ अन्य तरह की गंदगी को भी साफ करना होगा.
हर जगह पर सात दिनों में पैदा होने वाले कचरे का रिकॉर्ड रखा जाएगा. निगरानी के लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाएगा. बड़े कार्यक्रमों के लिए, जियो-टैग की गई तस्वीरों का इस्तेमाल करके दिन में दो बार सफाई के मानकों की निगरानी की जाएगी. गंदगी फैलाने या कचरा जलाने पर मौके पर ही जुर्माना लगाया जा सकता है. मनसा देवी मंदिर, शीतला माता मंदिर, ब्रह्मसरोवर इन तीन धार्मिक स्थलों पर अमल शुरू होगा.