menu-icon
India Daily

शराब के शौकीनों को बड़ी सौगात, ब्रह्म मूहर्त तक खुलेंगी दुकानें, आबकारी नीति में हुए बड़े बदलाव

हरियाणा मंत्रिमंडल ने 2025-27 के लिए नई आबकारी नीति को मंजूरी दे दी है. नई नीति 12 जून, 2025 से लागू होगी और 31 मार्च, 2027 तक 21.5 महीने तक प्रभावी रहेगी. 

garima
Edited By: Garima Singh
शराब के शौकीनों को बड़ी सौगात, ब्रह्म मूहर्त तक खुलेंगी दुकानें, आबकारी नीति में हुए बड़े बदलाव
Courtesy: x

Haryana new excise policy: हरियाणा मंत्रिमंडल ने 2025-27 के लिए नई आबकारी नीति को मंजूरी दे दी है. नई नीति 12 जून, 2025 से लागू होगी और 31 मार्च, 2027 तक 21.5 महीने तक प्रभावी रहेगी. 

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में यह निर्णय लिया गया. नीति का लक्ष्य शराब बिक्री और उपभोग को नियंत्रित करना है, साथ ही सामाजिक और नैतिक मूल्यों को बढ़ावा देना है. आइए जानते हैं इस नीति के प्रमुख प्रावधान. 

छोटे गांवों में शराब बिक्री पर रोक

नई नीति के तहत, 500 या उससे कम आबादी वाले गांवों में शराब की बिक्री पूरी तरह बैन होगी. 500 ​​या उससे कम आबादी वाले गांवों में कोई सब-वेंड की अनुमति नहीं दी जाएगी. इस फैसले से 152 मौजूदा उप-विक्रेता बंद हो जाएंगे. 

शराब विज्ञापनों पर सख्ती

शराब के विज्ञापनों पर भी कड़े बैन लगाए गए हैं. लाइसेंस प्राप्त क्षेत्रों में किसी भी प्रकार के विज्ञापन अब पूरी तरह समाप्त होंगे. उल्लंघन करने वालों पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा. पहली बार नियम तोड़ने वालों पर 1 लाख रुपये, दूसरी बार 2 लाख रुपये, और तीसरी बार 3 लाख रुपये तक भारी जुर्माना लगेगा. "इसके बाद कोई भी उल्लंघन बड़ा उल्लंघन माना जाएगा, जिसके परिणामस्वरूप आवंटित क्षेत्र को रद्द करने की कार्यवाही की जाएगी. 

शराबखानों के लिए नए नियम

शराबखानों (एल-52) के संचालन के लिए नियमों को और सख्त किया गया है. अब इन्हें केवल विभाग द्वारा अनुमोदित बंद परिसरों में संचालित किया जाएगा, जो राहगीरों को दिखाई नहीं देंगे. नीति में शराबखानों में लाइव गायन, नृत्य या नाटकीय प्रदर्शन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है. ताकि "नियंत्रित और जिम्मेदार शराब पीने का माहौल" सुनिश्चित हो सके. 

दुकानों के खुलने का समय

शहरी क्षेत्रों में शराब की दुकानें अब सुबह 4 बजे के बाद नहीं खुल सकेंगी, जबकि पहले यह समय सुबह 8 बजे था. यह कदम शराब की उपलब्धता को सीमित करने और अनुशासित उपभोग को बढ़ावा देने के लिए उठाया गया है.