गुरुग्राम: गुरुग्राम में रहने वाले 27 वर्षीय एक सॉफ्टवेयर डेवलपर की सोशल मीडिया पोस्ट इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है. युवक ने ऑनलाइन मंच रेडिट पर अपनी आर्थिक स्थिति साझा करते हुए बताया कि 1.5 लाख रुपये मासिक वेतन मिलने के बावजूद वह लगातार वित्तीय दबाव महसूस कर रहा है. उसकी पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर आय, खर्च और वित्तीय प्रबंधन को लेकर बहस शुरू हो गई है.
युवक ने बताया कि उसकी मासिक इन-हैंड सैलरी लगभग 1.44 लाख रुपये है. हाल ही में शादी होने के बाद उस पर कई तरह की जिम्मेदारियां बढ़ गई हैं. उसने लिखा कि उसकी आय सुनने में अच्छी लगती है, लेकिन मासिक खर्चों और कर्ज के कारण उसे यह राशि काफी कम महसूस होती है.
पोस्ट के अनुसार हर महीने 44,000 रुपये प्लॉट की ईएमआई में चले जाते हैं. इसके अलावा गुरुग्राम में घर का किराया 25,000 रुपये है. राशन पर लगभग 6,000 से 7,000 रुपये, वाहन के ईंधन पर 8,000 से 10,000 रुपये और पत्नी के निजी खर्चों के लिए करीब 15,000 रुपये खर्च होते हैं. वहीं बाहर खाने-पीने और अन्य दैनिक गतिविधियों पर भी हर महीने 7,000 से 8,000 रुपये तक खर्च हो जाते हैं.
युवक का कहना है कि नियमित खर्चों के अलावा कई ऐसे खर्च भी सामने आते हैं जिनकी पहले से योजना बनाना आसान नहीं होता. इनमें कार की सर्विसिंग, बीमा, मेडिकल खर्च और माता-पिता के घर का राशन जैसी जरूरतें शामिल हैं. इसके अलावा उस पर दोस्तों का लगभग 2.55 लाख रुपये का कर्ज भी है, जिसे वह धीरे-धीरे चुकाने की कोशिश कर रहा है.
उसने अपनी पोस्ट में यह भी स्वीकार किया कि जब वह अपने हमउम्र लोगों को अधिक आय अर्जित करते देखता है तो उसे चिंता होती है. उसे लगता है कि वह अपने परिवार को उतनी आर्थिक सुरक्षा और निश्चिंत जीवन नहीं दे पा रहा है, जितना वह देना चाहता है. हालांकि उसने उम्मीद जताई कि भविष्य में प्रमोशन और बोनस मिलने से उसकी स्थिति बेहतर हो सकती है.
पोस्ट वायरल होने के बाद कई लोगों ने अपनी राय दी. एक यूजर ने लिखा कि 1.5 लाख रुपये की मासिक आय देश के अधिकांश लोगों की तुलना में काफी बेहतर है और इस आय में आराम से जीवनयापन किया जा सकता है. जवाब में युवक ने कहा कि वह अपनी स्थिति को खराब नहीं बता रहा, लेकिन लगातार वित्तीय दबाव महसूस करता है.
वहीं कई अन्य यूजर्स ने उसका हौसला बढ़ाते हुए कहा कि 27 वर्ष की उम्र में इतनी आय हासिल करना बड़ी उपलब्धि है और उसे खुद को कमतर नहीं आंकना चाहिए. महंगाई और बढ़ते खर्चों के दौर में ऐसी चिंताएं सामान्य मानी जा सकती हैं.