सत्य निकेतन हादसा: ढाई की जगह बना दी 5 मंजिल, फायर NOC तक नहीं, नियमों को ताक पर रख कर चल रहा था PG
जांच में पता चला है कि सत्य निकेतन में ढही पांच मंजिला इमारत पूरी तरह अवैध थी. बिल्डिंग के पास फायर एनओसी भी नहीं थी.
सत्य निकेतन में ढही पांच मंजिला इमारत पूरी तरह से अवैध थी. मूल रूप से करीब 40 साल पहले बनी यह इमारत केवल ढाई मंजिल तक सीमित रहने के मानक पर आधारित थी. बाद के वर्षों में बिना किसी संरचनात्मक मजबूती के इस पर तीन और मंजिलें खड़ी कर दी गईं.
बेसमेंट में पानी और नींव कमजोर होने से हादसा
इमारत के बेसमेंट में हर साल बारिश का पानी भर जाता था. हाल ही में पानी निकालने के बाद मरम्मत का काम शुरू किया गया था. लंबे समय तक पानी के संपर्क में रहने से नींव पहले ही कमजोर हो चुकी थी. निर्माण कार्य के दौरान दीवार खिसकने से पूरी इमारत ताश के पत्तों की तरह ढह गई.
बिना फायर NOC और लीज पर पीजी का संचालन
मकान मालिक ने इस इमारत को 'हॉस्टल डेज' नाम की कंपनी को लीज पर दिया था, जो पिछले दो सालों से यहां पीजी चला रही थी. छात्रों की भारी आवाजाही के बावजूद भवन स्वामी और कंपनी ने नियमानुसार फायर एनओसी लेने की जहमत तक नहीं उठाई.
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साउथ कैंपस बना कमर्शियल पीजी का गढ़
दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के पास होने के कारण सत्य निकेतन में पीजी का कारोबार काफी फल-फूल रहा है. ब्लूम स्टे, येश पीजी, स्टेंजा और हॉस्टल डेज जैसी कई बड़ी कंपनियां आवासीय इमारतों को लीज पर लेकर बेधड़क पीजी में बदल रही हैं, जिससे सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं.
कानूनी रूप से क्यों अवैध था यह पीजी
मास्टर प्लान के नियमों के तहत रिहायशी इलाकों में बिना विशेष मंजूरी के व्यावसायिक पीजी नहीं चलाया जा सकता. साथ ही, 20 से अधिक लोगों की आवाजाही वाली पांच मंजिला इमारत के लिए सुरक्षा के लिहाज से फायर एनओसी होना अनिवार्य था, जिसका यहां पूर्ण उल्लंघन किया गया.
ढांचागत बदलाव से खत्म हुआ कानूनी संरक्षण
केंद्र सरकार के स्पेशल प्रोविजन एक्ट के तहत 1990 के इस अवैध निर्माण को एक सीमा तक संरक्षण मिला हुआ था. हालांकि, नियमों के मुताबिक इमारत में अनधिकृत ढांचागत बदलाव और मरम्मत का काम शुरू करते ही इसका कानूनी संरक्षण समाप्त हो गया और यह पूरी तरह अवैध श्रेणी में आ गई.