Delhi Building Collapse: छात्रों का गढ़ माना जाता है सत्‍य न‍िकेतन इलाका, हादसे वाली जगह से कितनी दूरी पर है DU साउथ कैंपस?

दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार को एक कई मंजिला इमारत अचानक गिरने से हड़कंप मच गया. यह इलाका दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के नजदीक होने के कारण छात्रों के बीच खास तौर पर जाना जाता है.

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Shanu Sharma

Delhi Building Collapse: दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार दोपहर एक इमारत भरभराकर गिर गई. घटना की सूचना करीब 1:30 बजे दमकल विभाग को मिली. इसके बाद दमकल की आठ गाड़ियों को मौके पर भेजा गया और बचाव अभियान शुरू किया गया. शुरुआती जानकारी के अनुसार, इमारत में हॉस्टल होने की बात सामने आई है. मलबे में 50 लोगों के दबे होने की आशंका जताई जा रही है.

घटनास्थल पर मौजूद बचाव दल मलबा हटाकर अंदर फंसे लोगों की तलाश में जुट गए हैं. हादसे के बाद इलाके में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग भी जमा हो गए. पुलिस और दमकल कर्मियों की ओर से मौके पर राहत कार्य जारी है.

क्यों खास है सत्य निकेतन का इलाका?

सत्य निकेतन दिल्ली का ऐसा इलाका है, जिसे बड़ी संख्या में छात्र अपने रहने और पढ़ाई के लिए चुनते हैं. इसकी सबसे बड़ी वजह आसपास मौजूद कई प्रमुख शिक्षण संस्थान हैं. इलाका दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के काफी करीब बताया जाता है. सत्य निकेतन के आसपास आत्माराम सनातन धर्म कॉलेज, मोतीलाल नेहरू कॉलेज, श्री वेंकटेश्वर कॉलेज, जीसस एंड मैरी कॉलेज और मैत्रेयी कॉलेज जैसे संस्थान मौजूद हैं. यही कारण है कि यहां सालभर छात्रों की आवाजाही बनी रहती है.


पीजी और हॉस्टल की वजह से रहती है चहल-पहल

कॉलेजों के आसपास होने के कारण सत्य निकेतन में छात्रों के लिए पीजी और हॉस्टल की काफी व्यवस्था है. यहां रहने वाले विद्यार्थियों में दिल्ली के बाहर से पढ़ाई के लिए आने वाले छात्र भी बड़ी संख्या में शामिल होते हैं. सत्य निकेतन में कई हॉस्टल और पीजी चलाए जा रहे हैं, ऐसे में मकान के गिरने से कई छात्रों के घायल होने की आशंका जताई जा रही है. छात्रों की मौजूदगी के कारण इलाके में सुबह से देर रात तक चहल-पहल रहती है. ऐसे में किसी हॉस्टल वाली इमारत के गिरने की सूचना ने आसपास रहने वाले छात्रों और उनके परिवारों की चिंता बढ़ा दी.

इमारत गिरने के बाद सबसे बड़ी प्राथमिकता मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना है. बचाव दल सावधानी से मलबा हटा रहा है ताकि अगर कोई व्यक्ति अंदर फंसा हो तो उसे नुकसान न पहुंचे. फिलहाल यह साफ नहीं है कि हादसे के समय इमारत के अंदर कितने लोग मौजूद थे, न ही किसी मौत या घायल होने की आधिकारिक पुष्टि हुई है. हालांकि इससे दो हफ्ते भी दिल्ली में मकान गिरनी की ऐसी घटना घटी थी, जिसमें एक इंसान की मौत हो गई और कई लोग घायल हो गए थे.