चांदनी चौक में MCD की बड़ी कार्रवाई, 56 ज्वेलरी दुकानें सील; करोड़ों का सोना-चांदी अंदर फंसा

दिल्ली के चांदनी चौक में MCD ने 56 ज्वेलरी दुकानों को सील कर दिया. व्यापारियों का दावा है कि उन्हें पहले सूचना नहीं दी गई. दुकानों के अंदर करोड़ों रुपये का सोना-चांदी फंसा हुआ है.

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Kuldeep Sharma

दिल्ली के चांदनी चौक स्थित कुचा महाजनी बुलियन मार्केट में 10 सितंबर को नगर निगम ने 56 ज्वेलरी दुकानों पर कार्रवाई की. व्यापारियों के मुताबिक, कई दुकानों में करोड़ों रुपये के आभूषण और कीमती सामान बंद हैं. उनका आरोप है कि MCD और पुलिस की टीम ने अचानक कार्रवाई की.

एक साथ कई दुकानों पर हुई कार्रवाई

व्यापारियों के अनुसार, MCD के अधिकारी और पुलिसकर्मी करीब 11:30 बजे बाजार पहुंचे और दुकानों पर नोटिस चिपकाने के बाद उन्हें सील करना शुरू कर दिया. ऑल इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन के प्रमुख योगेश सिंघल ने बताया कि कई कारोबारी जब अपनी दुकानों पर पहुंचे, तब उन्हें कार्रवाई की जानकारी मिली. व्यापारियों का आरोप है कि उन्हें पहले से पर्याप्त सूचना नहीं दी गई थी.

नोटिस की तारीख को लेकर भी सवाल

व्यापारी संगठन ने दावा किया कि कुछ नोटिसों पर पुरानी तारीख दर्ज थी. एक सामने आए नोटिस पर 12 मई की तारीख बताई गई है. इसमें बेसमेंट के कथित अनधिकृत व्यावसायिक इस्तेमाल को रोकने और 48 घंटे के भीतर परिसर को मास्टर प्लान-2021 के तहत अनुमत उपयोग के अनुरूप करने का निर्देश दिया गया था. इसके बाद सीलिंग की कार्रवाई की गई.


सत्‍य निकेतन हादसे के बाद बढ़ी सख्ती

दिल्ली के सत्य निकेतन में 6 सितंबर को पांच मंजिला PG इमारत गिरने के बाद राजधानी में खतरनाक और अवैध निर्माण के खिलाफ जांच तेज हुई है. हादसे में सात लोगों की मौत और 12 लोग घायल हुए थे. शुरुआती जांच में इमारत में किए गए असुरक्षित बदलाव सामने आए. पुलिस ने मालिक, उसके बेटे, ऑपरेटर और ठेकेदार को गिरफ्तार किया, जबकि MCD ने पांच अधिकारियों को निलंबित किया.

व्यापारियों ने उठाया बड़ा सवाल

व्यापारी संगठन ने कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि दुकानों के भीतर बड़ी मात्रा में सोना-चांदी और अन्य कीमती सामान बंद है, जिससे कारोबारियों की चिंता बढ़ गई है. संगठन ने पूछा कि यदि अवैध निर्माण पर कार्रवाई हो रही है तो संबंधित सरकारी विभागों और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए. MCD की ओर से इन आरोपों पर तत्काल प्रतिक्रिया नहीं दी गई. इस मामले की निगरानी सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर दिल्ली हाईकोर्ट कर रहा है.