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India Daily

दिल्ली में नकली पहचान के साथ फर्जी जज और उसका दोस्त गिरफ्तार, अवैध हथियार के साथ कार भी हुई जब्त

दिल्ली में फर्जी जज बनकर घूम रहे दो युवकों को पुलिस ने गिरफ्तार किया. उनके पास से अवैध हथियार, कारतूस और नकली दस्तावेज बरामद हुए हैं.

Km Jaya
Edited By: Km Jaya
दिल्ली में नकली पहचान के साथ फर्जी जज और उसका दोस्त गिरफ्तार, अवैध हथियार के साथ कार भी हुई जब्त
Courtesy: Pinterest

नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस ने एक नकली न्यायिक अधिकारी को गिरफ्तार किया, जिसके पास से हथियार बरामद हुआ. इसके अलावा पुलिस ने उसके दोस्त को भी गिरफ्तार किया. यह जानकारी एक पुलिस अधिकारी ने  साझा की. गिरफ्तार आरोपियों में से एक पर जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल करके न्यायिक अधिकारी होने का ढोंग करने का आरोप है. उनके कब्जे से एक हथियार और जिंदा कारतूस बरामद किए गए.

आरोपियों की पहचान 31 साल के सूर्य अग्रवाल और 21 साल के निखिल यादव के रूप में हुई है. दोनों उत्तर प्रदेश के झांसी जिले के रहने वाले हैं. पुलिस के अनुसार ये गिरफ्तारियां पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन की एक टीम द्वारा की गईं. यह ऑपरेशन राष्ट्रीय राजधानी के भीतर संभावित सुरक्षा खतरों की जांच के लिए चल रहे एक अभियान के हिस्से के रूप में चलाया गया था.

DCP सचिन शर्मा ने क्या बताया?

नई दिल्ली के पुलिस उपायुक्त यानी DCP सचिन शर्मा ने एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया, '5 अप्रैल को शाम लगभग 5:00 बजे, टीम ने एक संदिग्ध SUV को रोका. वाहन बिना रजिस्ट्रेशन नंबर प्लेट के चल रहा था और उसकी खिड़कियों पर टिंटेड फिल्म लगी हुई थी. वाहन पर 'जज, उत्तर प्रदेश सरकार' लिखा एक स्टिकर भी लगा था, जिससे शक पैदा हुआ.'

पूछताछ के दौरान क्या चला पता?

DCP ने आगे बताया कि तलाशी के दौरान निखिल यादव के पास से एक पिस्तौल और चार जिंदा कारतूस बरामद हुए, जबकि अग्रवाल के कब्जे से पांच जिंदा कारतूस मिले. पूछताछ के दौरान अग्रवाल ने खुद को एक वकील बताया, जबकि साथ ही वह उत्तर प्रदेश का सिविल जज होने का ढोंग भी कर रहा था. 

उसने एक न्यायिक पहचान पत्र और एक पत्र पेश किया, जो कथित तौर पर उत्तर प्रदेश के अधिकारियों द्वारा जारी किए गए थे. उसने दावा किया कि उसके पास दिल्ली के भीतर हथियार रखने के लिए जरूरी अनुमति है.

जांच में क्या आया सामने?

जांच करने पर पुलिस को पता चला कि पहचान पत्र और उसके साथ का पत्र दोनों ही जाली थे और उनमें डिजिटल रूप से छेड़छाड़ की गई थी. बाद में पुलिस को पता चला कि अग्रवाल के पास उत्तर प्रदेश में जारी एक वैध हथियार लाइसेंस था. हालांकि यह लाइसेंस केवल उसी राज्य तक सीमित था और उसे दिल्ली के भीतर हथियार रखने का अधिकार नहीं देता था.

क्या-क्या हुआ बरामद?

पुलिस ने पिस्तौल, नौ जिंदा कारतूस, घटना में इस्तेमाल हुई SUV, एक जाली पहचान पत्र, एक मनगढ़ंत अधिकार पत्र और किसी सरकारी पद का झूठा दावा करने के लिए इस्तेमाल किए गए स्टिकर जब्त कर लिए हैं. इसके अलावा इन जाली दस्तावेजों के स्रोत का पता लगाने के प्रयास भी किए जा रहे हैं.