दिल्ली में प्राइवेट स्कूल फीस कंट्रोल एक्ट: आप का बीजेपी पर अटैक, आप नेता सौरभ भारद्वाज ने रेखा गुप्ता सरकार पर लगाया मिलीभगत का आरोप
.सौरभ भारद्वाज ने कहा कि यह कानून स्कूल माफिया की लॉटरी साबित हुआ है और दिल्ली के मिडिल क्लास अभिभावकों के साथ धोखा है
नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (AAP) के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष और विधायक सौरभ भारद्वाज ने बुधवार को पार्टी मुख्यालय में प्रेस वार्ता कर भाजपा की रेखा गुप्ता सरकार पर प्राइवेट स्कूल फीस कंट्रोल एक्ट को लेकर बड़ा हमला बोला.उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने प्राइवेट स्कूल लॉबी के साथ मिलकर अभिभावकों को धोखा दिया है और सुप्रीम कोर्ट में सरेंडर कर दिया, जिससे 2025-26 सत्र में 20 से 80 फीसदी तक बढ़ाई गई फीस को वैधता मिल गई.
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि भाजपा सरकार बनते ही निजी स्कूलों ने मनमानी फीस बढ़ाई, जिससे दिल्ली में हाहाकार मच गया.अभिभावकों के विरोध और प्रदर्शनों के बाद सरकार ने फीस नियंत्रण का वादा किया, लेकिन कानून चुपके से बनाया और बिना चर्चा के लागू कर दिया.उन्होंने इसे "मास्टर स्ट्रोक" बताने वाली सरकार पर तंज कसा कि यह कानून बढ़ी फीस को कम नहीं कर सकता, बल्कि स्कूल मालिकों की जेब भरने का माध्यम है.
प्रेस वार्ता में उन्होंने खुलासा किया कि जिस प्राइवेट स्कूल एक्शन कमिटी (गैर-सहायता प्राप्त मान्यता प्राप्त पब्लिक स्कूल एक्शन कमिटी) ने कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, उसके चेयरमैन भरत अरोड़ा भाजपा दिल्ली के शिक्षक प्रकोष्ठ के अध्यक्ष हैं.भरत अरोड़ा दिल्ली कार्यकारिणी सदस्य और एकेडमिक सेल के प्रमुख भी हैं. सौरभ भारद्वाज ने तस्वीरें दिखाते हुए बताया कि भरत अरोड़ा चुनाव से पहले रेखा गुप्ता के साथ प्रचार करते नजर आए, मोदी जी का पटका पहने और भाजपा के लिए वोट मांगते रहे.उनका सोशल मीडिया प्रोफाइल भी भाजपा पदाधिकारी और एक्शन कमिटी चेयरमैन दोनों दिखाता है.
उन्होंने शिक्षा मंत्री आशीष सूद के बयान को "हैरान करने वाला" बताया कि मंत्री इसे अभिभावकों की जीत बता रहे हैं, जबकि सरकार ने कोर्ट में स्पष्ट किया कि कानून 1 अप्रैल 2025 से बढ़ी फीस पर लागू नहीं होगा.यह मिलीभगत वाला मुकदमा था, जहां दोनों पक्ष समझौते से सरेंडर कर देते हैं.सौरभ भारद्वाज ने कहा कि यह कानून स्कूल माफिया की लॉटरी साबित हुआ है और दिल्ली के मिडिल क्लास अभिभावकों के साथ धोखा है/ AAP ने मांग की कि बढ़ी फीस पर तत्काल जांच हो और अभिभावकों के हितों की रक्षा की जाए.यह मामला दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था में राजनीतिक सांठगांठ को उजागर कर रहा है।