नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में एक बार फिर प्रदूषण ने लोगों की सांसें मुश्किल कर दी हैं. गुरुवार को एयर क्वालिटी इंडेक्स 343 तक पहुंच गया, जिससे हवा ‘बहुत खराब’ श्रेणी में दर्ज की गई. प्रदूषण की यह स्थिति केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर आम लोगों की सेहत और दिनचर्या पर दिखाई दे रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि कम हवा की गति के कारण फिलहाल हालात सुधरने के आसार नहीं हैं.
गुरुवार को दिल्ली का AQI 300 के पार रहा, जो साफ तौर पर ‘बहुत खराब’ स्थिति को दर्शाता है. सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के मुताबिक AQI 343 दर्ज किया गया. हालांकि बुधवार के मुकाबले इसमें करीब दस अंकों का सुधार हुआ, लेकिन यह राहत केवल कागजी है. प्रदूषण का स्तर अब भी इतना अधिक है कि संवेदनशील लोगों के लिए बाहर निकलना जोखिम भरा बना हुआ है.
CPCB के SAMEER ऐप के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली के 34 मॉनिटरिंग स्टेशन ‘बहुत खराब’ श्रेणी में रहे, जबकि पांच स्टेशन ‘खराब’ कैटेगरी में दर्ज किए गए. कुछ इलाकों में हालात और भी चिंताजनक रहे. पूसा, नेहरू नगर, ओखला फेज टू और विवेक विहार जैसे क्षेत्रों में AQI 380 से ऊपर पहुंच गया, जिसे ‘गंभीर’ श्रेणी माना जाता है.
एयर क्वालिटी अर्ली वार्निंग सिस्टम के मुताबिक अगले दो दिनों तक हवा की गति दस किलोमीटर प्रति घंटे से कम रह सकती है. ऐसी स्थिति में प्रदूषक कण वातावरण में ही फंसे रहते हैं और उनका फैलाव नहीं हो पाता. यही कारण है कि आने वाले दिनों में भी दिल्ली की हवा ‘बहुत खराब’ स्तर पर बने रहने की आशंका जताई गई है.
प्रदूषण के इस स्तर पर सांस संबंधी बीमारियों, आंखों में जलन और सिरदर्द जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं. डॉक्टरों का कहना है कि बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए. कई इलाकों में लोग मास्क पहनकर बाहर निकलते नजर आए, जबकि विदेशी पर्यटक भी कर्तव्य पथ जैसे क्षेत्रों में प्रदूषण से बचाव करते दिखे.
फिलहाल मौसम के हालात प्रदूषण के पक्ष में बने हुए हैं. जब तक हवा की गति नहीं बढ़ती या मौसम में बड़ा बदलाव नहीं आता, तब तक दिल्लीवासियों को साफ हवा के लिए इंतजार करना पड़ सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखना और एहतियाती कदम उठाना इस समय सबसे जरूरी है.