दिल्ली में Heat Stroke का कहर! डॉक्टरों ने मरीजों को बर्फ में डुबोकर बचाई जान, जानिए कितनी खतरनाक है ये मेडिकल इमरजेंसी
दिल्ली में भीषण गर्मी के बीच आरएमएल अस्पताल में हीट स्ट्रोक के दो गंभीर मामले आए हैं जहां मरीजों का तापमान 105 डिग्री तक पहुंचने पर डॉक्टरों ने बर्फ के पानी वाले टब से उनकी जान बचाई.
नई दिल्ली: दिल्ली में इस समय भीषण गर्मी के कारण 'हीट स्ट्रोक' के मामले लगातार बढ़ रहे हैं जिसने डॉक्टरों और प्रशासन की टेंशन बढ़ा दी है. डॉक्टरों का कहना है कि हीट स्ट्रोक गर्मी से होने वाली सबसे खतरनाक बीमारियों में से एक है क्योंकि यह शरीर के जरूरी अंगों को बहुत जल्दी नुकसान पहुंचाता है.
अगर सही समय पर इलाज न मिले तो यह जानलेवा भी हो सकता है. हाल ही में दिल्ली के आरएमएल अस्पताल में हीट स्ट्रोक के दो बेहद गंभीर मामले सामने आए हैं जहां मरीजों की जान बचाने के लिए डॉक्टरों को आपातकालीन तकनीक अपनाते हुए उन्हें बर्फ के पानी के टब में रखना पड़ा.
बंगाल के छात्र को ट्रेन में लगी लू
इनमें से पहला मामला पश्चिम बंगाल के एक 24 साल के छात्र का है जो ट्रेन से दिल्ली आया था. डॉक्टरों के मुताबिक उसने भीषण गर्मी में ट्रेन के एक खचाखच भरे जनरल डिब्बे में सफर किया था. भीड़, उमस और पानी की कमी के कारण उसका शरीर अंदर से बहुत ज्यादा गर्म हो गया था. जब उसे अस्पताल लाया गया तो उसका तापमान करीब 105 डिग्री फारेनहाइट तक पहुंच चुका था.
शुरुआत में डॉक्टरों को लगा कि उसे ब्रेन स्ट्रोक हुआ है लेकिन सीटी स्कैन में ऐसा कुछ नहीं निकला. जांच के बाद साफ हुआ कि यह हीट स्ट्रोक का गंभीर मामला है. शरीर का तापमान तुरंत कम करने के लिए डॉक्टरों ने उसे करीब 15 से 20 मिनट के लिए बर्फ के पानी से भरे टब में लिटा दिया. फिलहाल उस छात्र को आईसीयू (ICU) में वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया है.
50 साल के शख्स को आया हीट स्ट्रोक
दूसरा मामला एक 50 साल के व्यक्ति का है जिसे दिल्ली पुलिस की पीसीआर वैन ने बेहोशी की हालत में इसी अस्पताल में भर्ती कराया है. उस समय उसका तापमान 104 डिग्री फारेनहाइट था. उसकी जान बचाने के लिए भी डॉक्टरों ने उसे तुरंत बर्फ के पानी वाले टब में डाला. इस मरीज की हालत भी अभी नाजुक बनी हुई है.
क्या होता है हीट स्ट्रोक?
एक्सपर्ट बताते हैं कि हीट स्ट्रोक तब होता है जब हमारा शरीर खुद को ठंडा रखने की क्षमता खो देता है. आम तौर पर पसीना आने से शरीर का तापमान नियंत्रित रहता है लेकिन बहुत ज्यादा गर्मी और पानी की कमी के कारण यह सिस्टम काम करना बंद कर देता है. इसके चलते शरीर का तापमान अचानक 40 डिग्री सेल्सियस 104 डिग्री फारेनहाइट के पार चला जाता है जो दिमाग, किडनी और दिल पर सीधा असर डालता है. इसके लक्षणों में चक्कर आना, बेहोशी, उल्टी, तेज सांस चलना और कन्फ्यूजन शामिल हैं.
आम लू और हीट स्ट्रोक में क्या फर्क है?
डॉक्टरों का कहना है कि लोग अक्सर आम लू और हीट स्ट्रोक को एक ही समझ लेते हैं जबकि दोनों में बड़ा अंतर है. आम लू में कमजोरी, सिरदर्द, बहुत पसीना आना या थकान होती है जो आराम करने और पानी-ओआरएस पीने से ठीक हो जाती है. लेकिन हीट स्ट्रोक एक मेडिकल इमरजेंसी है जिसमें मरीज का शरीर तपने लगता है पसीना आना बंद हो सकता है और वह बेहोश हो जाता है. इसमें जरा सी भी देरी अंगों के फेल होने या मौत का कारण बन सकती है.
तुरंत क्या करें?
अगर तेज गर्मी में कोई बेहोश हो जाए, उसे तेज बुखार हो या दौरे पड़ें तो उसे तुरंत अस्पताल ले जाएं. जब तक डॉक्टर न मिलें मरीज को किसी ठंडी या छायादार जगह पर ले जाएं उसके कपड़े ढीले करें और पूरे शरीर पर ठंडे पानी की पट्टियां या बर्फ लगाएं. अगर मरीज होश में है तो ही उसे पानी दें बेहोशी की हालत में मुंह में पानी डालने की गलती बिल्कुल न करें.
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