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'....झुकूंगी नहीं', कोर्ट से दोषी ठहराए जाने के बाद बोलीं कांग्रेस नेत्री अलका लांबा

दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने साल 2024 में जंतर-मंतर पर महिला आरक्षण के समर्थन में बिना अनुमति विरोध प्रदर्शन करने के एक पुराने मामले में कांग्रेस की वरिष्ठ नेता अलका लांबा को दोषी करार दिया है.

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Kanhaiya Kumar Jha

नई दिल्ली: देश की राजधानी नई दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने महिला अधिकारों को लेकर हुए आंदोलन के मामले में कांग्रेस नेता अलका लांबा को दोषी ठहराया है. अदालत के इस फैसले के बाद दिल्ली के सियासी गलियारों में अचानक हलचल तेज हो गई है. विशेष अदालत ने उनकी सजा की अवधि पर अंतिम बहस के लिए आगामी 4 जून की तारीख मुकर्रर की है.

यह पूरा मामला साल 2024 में दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित विरोध प्रदर्शन से जुड़ा हुआ है. उस समय केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ महिला आरक्षण और सुरक्षा की मांग को लेकर कांग्रेस और अन्य संगठनों ने भारी प्रदर्शन किया था. दिल्ली पुलिस ने तब आरोप लगाया था कि यह आंदोलन बिना किसी प्रशासनिक अनुमति के किया गया था, जिससे राजधानी की कानून-व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई थी. इसी आधार पर पुलिस ने अलका लांबा और अन्य प्रदर्शनकारियों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज की थी.

2 सालों तक कोर्ट में चला मामला

पुलिस ने मामले की गहन जांच करने के बाद साल 2024 में ही अदालत के समक्ष अपनी अंतिम चार्जशीट दाखिल कर दी थी. इसके बाद साल 2025 से लेकर 2026 के मध्य तक अलका लांबा को इस मामले की सुनवाई के सिलसिले में लगातार राउज एवेन्यू कोर्ट के चक्कर काटने पड़े. लंबी न्यायिक बहस और गवाहों के बयानों को दर्ज करने के बाद, आखिरकार अदालत ने सोमवार को अपना फैसला सुनाते हुए पूर्व विधायक को इस मामले में पूर्ण रूप से दोषी मान लिया है.


सजा का ऐलान होना बाकी

हालांकि, अदालत के आज के संक्षिप्त आदेश से अभी तक यह पूरी तरह साफ नहीं हो पाया है कि न्यायाधीश ने भारतीय न्याय संहिता या आईपीसी की किन विशिष्ट धाराओं के तहत अलका लांबा को दोषी ठहराया है. उन्हें इस मामले में अधिकतम कितनी जेल की सजा या जुर्माना हो सकता है, इसका अंतिम खुलासा भी अब आगामी 4 जून को होने वाली अंतिम अदालती सुनवाई के दौरान ही होगा. इस कानूनी अनिश्चितता के कारण कांग्रेस कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश देखा जा रहा है.

अदालत परिसर से बाहर निकलने के बाद अलका लांबा ने मीडिया के सामने अपनी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने दिल्ली पुलिस पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि पुलिस ने तत्कालीन राजनीतिक आकाओं के भारी दबाव में और अपनी कुर्सियां बचाने के लालच में उन पर यह झूठी प्राथमिकी दर्ज की थी. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि आज उन्हें पता चला है कि देश में महिलाओं की सुरक्षा के लिए आवाज उठाना भी एक बहुत बड़ा अपराध बन गया है.

'जेल जाने को तैयार, नहीं मानूंगी हार'

अपने इरादे साफ करते हुए कांग्रेस नेता ने कहा कि वे इस फैसले से बिल्कुल भी डरने वाली नहीं हैं. उन्होंने अदालत के फैसले को चुनौती देते हुए कहा, 'अगर महिलाओं के हक के लिए लड़ना गुनाह है, तो इस अपराध में मिली हर सजा का मैं दिल से स्वागत करती हूं. प्रशासन मुझे जितनी मर्जी चाहे उतनी सजाएं दे दे, मैं झुकूंगी नहीं.'