दिल्ली वालों के लिए जरूरी सूचना, आज से घर-घर पहुंचेगी जनगणना टीम; पूछे जाएंगे 33 सवाल

दिल्ली के एमसीडी क्षेत्रों में आज से हाउसिंग सर्वे शुरू हो गया है. 50 हजार कर्मचारी घर-घर जाकर 33 सवाल पूछेंगे. जनगणना में शामिल न होने पर जुर्माना और सजा का प्रावधान है.

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Km Jaya

नई दिल्ली: दिल्ली में जनगणना के पहले चरण के तहत शनिवार को दिल्ली नगर निगम के अधिकार क्षेत्र में आने वाले इलाकों में आवास सर्वेक्षण शुरू हो गया. इस बड़े काम के लिए राजधानी के 12 जिलों में 50,000 से ज्यादा कर्मचारियों को तैनात किया गया है. वे घर-घर जाकर लोगों से जानकारी इकट्ठा करेंगे.

अधिकारियों के मुताबिक जनगणना करने वाले लोग लोगों के घरों में जाकर आवास सर्वेक्षण से जुड़े 33 सवाल पूछेंगे और दी गई जानकारी को रिकॉर्ड करेंगे. जिन लोगों ने पहले ही ऑनलाइन खुद से जनगणना की प्रक्रिया पूरी कर ली है, उनकी दी गई जानकारी की जांच की जाएगी. इसे आसान बनाने के लिए लोगों को अपना ऑनलाइन फॉर्म जमा करने के बाद मिली एक खास ID जनगणना करने वालों को दिखानी होगी.

वरिष्ठ अधिकारियों ने क्या कहा?

वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि आवास सर्वेक्षण 16 अप्रैल को नई दिल्ली नगर परिषद यानी NDMC और दिल्ली छावनी इलाकों में पहले ही शुरू हो चुका था, जहां यह प्रक्रिया अब पूरी हो चुकी है. अब शनिवार से यह अभियान MCD के तहत आने वाले 250 वार्डों में शुरू किया गया है.

अधिकारियों ने क्या समझाया?

अधिकारियों के मुताबिक MCD इलाकों में लगभग 30 से 32 लाख घर हैं. इन इलाकों को लगभग 46,000 'हाउसलिस्टिंग ब्लॉक' में बांटा गया है. हर ब्लॉक में लगभग 180 से 200 घर होते हैं. सर्वेक्षण में लगे जनगणना करने वालों और सुपरवाइज़र की पहचान की जांच करने के लिए लोग उनसे उनके सरकारी पहचान पत्र दिखाने के लिए कह सकते हैं और उन पर छपे QR कोड को भी स्कैन कर सकते हैं.

अधिकारियों का क्या रुख है?

अधिकारियों ने साफ तौर पर कहा है कि जनगणना में हिस्सा लेना सभी नागरिकों के लिए जरूरी है. अगर कोई व्यक्ति जानकारी देने से मना करता है तो पहले उसे समझाया जाएगा और सहयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा. अगर इसके बाद भी वे सहयोग नहीं करते हैं, तो जनगणना अधिनियम 1948 की धारा 11 के तहत उन पर ₹1,000 तक का जुर्माना लगाया जा सकता है. गंभीर मामलों में तीन साल तक की जेल का भी प्रावधान है. 

क्या है योजना?

अधिकारियों के अनुसार 1 मई से 15 मई के बीच कुल 1,54,000 लोगों ने स्व-गणना अभियान में हिस्सा लेने की कोशिश की. इनमें से 1,32,000 से ज्यादा लोगों ने सफलतापूर्वक अपनी जानकारी जमा कर दी. दक्षिण-पश्चिम ज़िले में सबसे ज्यादा लोगों 26,475 ने ​​स्व-गणना का विकल्प चुना, जबकि पुरानी दिल्ली ज़िले में सबसे कम संख्या 811 मामले दर्ज की गई. प्रशासन का कहना है कि राजधानी के लिए आबादी और आवास से जुड़ा सटीक डेटा इकट्ठा करने के लिए यह अभियान बहुत जरूरी है.