क्यों ‘वोट चोर गद्दी छोड़’ रैली में अकेले उतर रही कांग्रेस, क्या INDIA गठबंधन में आई खटास?
दिल्ली के रामलीला मैदान में कांग्रेस ‘वोट चोर गद्दी छोड़’ रैली करेगी. पार्टी चुनाव आयोग और बीजेपी पर वोट चोरी का आरोप लगा रही है. रैली में मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी समेत कई बड़े नेता शामिल होंगे.
नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में कांग्रेस पार्टी एक बार फिर चुनाव आयोग और केंद्र की सत्ता में बैठी बीजेपी के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाने जा रही है. पार्टी ऐतिहासिक रामलीला मैदान में ‘वोट चोर गद्दी छोड़’ नाम से एक बड़ी रैली आयोजित कर रही है. कांग्रेस का आरोप है कि बीजेपी ने चुनाव आयोग से मिलीभगत कर वोट चोरी की है और लोकतंत्र को कमजोर किया जा रहा है.
इस रैली के जरिए कांग्रेस न सिर्फ केंद्र सरकार को घेरना चाहती है, बल्कि देशभर में इस मुद्दे को बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश भी कर रही है. इस रैली में कांग्रेस के लगभग सभी बड़े चेहरे शामिल होंगे. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी, महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा, केसी वेणुगोपाल, जयराम रमेश और सचिन पायलट जैसे नेता मंच साझा करेंगे.
INDIA गठबंधन से मिली थी 2024 में ताकत
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब वोट चोरी के मुद्दे पर विपक्ष के कई दल कांग्रेस के साथ खड़े हैं, तो फिर INDIA गठबंधन के सहयोगी दलों को इस रैली में क्यों नहीं बुलाया गया? यह बात किसी से छिपी नहीं है कि 2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस का प्रदर्शन बेहद कमजोर रहा था. लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने INDIA गठबंधन के तहत कई क्षेत्रीय दलों के साथ मिलकर चुनाव लड़ा.
इसका सीधा फायदा कांग्रेस को मिला और पार्टी की सीटें बढ़कर 99 तक पहुंच गईं. समाजवादी पार्टी, शिवसेना (यूबीटी), झारखंड मुक्ति मोर्चा और एनसीपी (शरद पवार) जैसे दलों को भी इस गठबंधन से फायदा हुआ था. ऐसे में सवाल उठता है कि जब गठबंधन ने कांग्रेस को मजबूती दी, तो अब इतनी अहम रैली में सहयोगियों को अलग क्यों रखा गया?
विधानसभा चुनावों में विपक्ष को लगे झटके
लोकसभा चुनाव के बाद हुए कई विधानसभा चुनावों में विपक्ष को लगातार झटके लगे. हरियाणा, महाराष्ट्र, जम्मू-कश्मीर, झारखंड, दिल्ली और बिहार जैसे राज्यों में विपक्ष का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा. इनमें सबसे ज्यादा नुकसान कांग्रेस को हुआ. हरियाणा में कहा गया कि कांग्रेस जीत के बेहद करीब आकर बाजी हार गई. जम्मू-कश्मीर में INDIA गठबंधन की सरकार बनने के बावजूद कांग्रेस का प्रदर्शन इतना कमजोर रहा कि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने उसे सरकार में शामिल नहीं किया.
झारखंड में गठबंधन की जीत जरूर हुई, लेकिन कांग्रेस का योगदान सीमित रहा.दिल्ली में तो हालात और भी खराब रहे. आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के बीच सीट शेयरिंग नहीं हो पाई, जिससे मुकाबला त्रिकोणीय बन गया. महाराष्ट्र में विधानसभा चुनावों में महाविकास अघाड़ी की करारी हार के बाद शिवसेना (यूबीटी) ने इसका जिम्मेदार कांग्रेस को ठहराया.
बिहार में क्यों नहीं चला वोट चोरी का मुद्दा?
बिहार विधानसभा चुनाव से पहले चुनाव आयोग द्वारा SIR कराए जाने पर राहुल गांधी ने इसे वोट चोरी से जोड़ दिया था. उन्होंने 16 दिनों की वोटर अधिकार यात्रा भी निकाली और लगातार प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुनाव आयोग पर सवाल उठाए. इसके बावजूद बिहार चुनाव में आरजेडी, कांग्रेस और लेफ्ट पार्टियों के गठबंधन को करारी हार का सामना करना पड़ा. कांग्रेस सिर्फ 6 सीटें ही जीत सकी. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस हार में कांग्रेस की रणनीति और नेतृत्व की भी बड़ी भूमिका रही.
वोट चोरी पर विपक्ष साथ, फिर रैली अकेले क्यों?
दिलचस्प बात यह है कि वोट चोरी के मुद्दे पर INDIA गठबंधन के कई दल कांग्रेस के साथ खड़े नजर आते हैं. समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, शिवसेना (यूबीटी), एनसीपी (शरद पवार), आम आदमी पार्टी और डीएमके जैसी पार्टियां एसआईआर और वोटर लिस्ट से जुड़े मुद्दों पर चुनाव आयोग का विरोध कर चुकी हैं. इसके बावजूद दिल्ली की इस बड़ी रैली में इन दलों को आमंत्रित नहीं किया गया है, जिससे सियासी हलकों में सवाल उठ रहे हैं.
कांग्रेस बनाना चाहती है राष्ट्रीय नैरेटिव?
कांग्रेस महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल ने साफ संकेत दिए हैं कि पार्टी वोट चोरी के मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर ले जाना चाहती है. उन्होंने बताया कि कांग्रेस ने देशभर से करीब 5.5 करोड़ हस्ताक्षर इकट्ठा किए हैं. केसी वेणुगोपाल के मुताबिक राहुल गांधी ने सबूतों के साथ दिखाया है कि वोट चोरी कैसे हो रही है. उन्होंने यह भी कहा कि राहुल गांधी ने गृह मंत्री को इस मुद्दे पर खुली बहस की चुनौती दी थी, लेकिन सरकार की ओर से कोई जवाब नहीं आया.
जनता के बीच चर्चा तेज
केसी वेणुगोपाल ने कहा कि इस मुद्दे पर जनता के बीच चर्चा तेज हो रही है, इसलिए पार्टी ने इसे और गति देने का फैसला किया है. रैली के बाद कांग्रेस राष्ट्रपति से मिलने का अनुरोध भी करेगी और उन्हें हस्ताक्षरों वाला ज्ञापन सौंपेगी. यह रैली लोकसभा में चुनाव सुधारों पर हुई हालिया बहस के बाद हो रही है, जिससे इसका राजनीतिक महत्व और बढ़ जाता है.
रैली का मुद्दा
कुल मिलाकर, दिल्ली की यह रैली साफ संकेत देती है कि कांग्रेस अब वोट चोरी के मुद्दे को अपना मुख्य हथियार बनाकर राष्ट्रीय राजनीति में खुद को फिर से मजबूत करने की कोशिश कर रही है. साथ ही, यह भी माना जा रहा है कि कांग्रेस इस मुद्दे पर अकेले आगे बढ़कर क्षेत्रीय दलों से अलग अपनी पहचान बनाना चाहती है.