गर्मी ने छीन ली लोगों की रातों की नींद, इस शहर के लोग सबसे ज्यादा हो रहे परेशान; रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

क्लाइमेट सेंट्रल की नई रिपोर्ट के मुताबिक, बढ़ती गर्मी और जलवायु परिवर्तन का असर अब लोगों की नींद पर भी पड़ने लगा है. 2020 से 2025 के बीच भारत के कई शहरों में लोग सालाना 66 से 93 घंटे तक कम सो रहे हैं.

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Reepu Kumari

नई दिल्ली: जलवायु परिवर्तन का असर अब केवल तापमान बढ़ने तक सीमित नहीं रह गया है. इसका प्रभाव लोगों की दिनचर्या और स्वास्थ्य पर भी साफ दिखाई देने लगा है. क्लाइमेट सेंट्रल की नई रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि भारत के कई शहरों में बढ़ती रात की गर्मी लोगों की नींद कम कर रही है.रिपोर्ट के अनुसार, 2020 से 2025 के बीच रात के बढ़ते तापमान की वजह से कई शहरों में लोग हर साल 66 से 93 घंटे तक कम सो पा रहे हैं. सबसे अधिक असर दक्षिण भारत के कुछ शहरों में दर्ज किया गया है, जबकि दिल्ली भी इस सूची में शामिल है.

इन शहरों में सबसे ज्यादा घटी नींद

क्लाइमेट सेंट्रल की रिपोर्ट में चेन्नई, नेल्लोर और कोझिकोड को सबसे अधिक प्रभावित शहरों में शामिल किया गया है. इनके अलावा मुंबई, कोलकाता, बेंगलुरु और दिल्ली में भी रात की गर्मी के कारण लोगों की नींद प्रभावित होने की बात कही गई है. रिपोर्ट बताती है कि बढ़ते तापमान का असर देश के कई बड़े शहरों में महसूस किया जा रहा है.

2020 से 2025 के आंकड़ों पर आधारित अध्ययन

रिपोर्ट में 2020 से 2025 के बीच के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया है. इसके मुताबिक, रात की गर्मी के कारण औसतन हर व्यक्ति ने सालभर में लगभग 56 घंटे की नींद गंवाई. कई भारतीय शहरों में यह आंकड़ा 80 से 90 घंटे तक पहुंच गया. दक्षिण भारत के शहरों में औसतन 84 घंटे की नींद कम हुई, जबकि दिल्ली में यह आंकड़ा 67 घंटे दर्ज किया गया.


जलवायु परिवर्तन को माना गया प्रमुख कारण

रिपोर्ट में कहा गया है कि वैज्ञानिकों ने वास्तविक तापमान की तुलना उस संभावित तापमान से की, जो ग्लोबल वार्मिंग नहीं होने पर होता. इसी तुलना के आधार पर यह अनुमान लगाया गया कि लोगों की नींद में आई कमी में जलवायु परिवर्तन की कितनी भूमिका रही है. अध्ययन में बढ़ती रात की गर्मी को प्रमुख कारण बताया गया है.

1970 के दशक की तुलना में दोगुना असर

अध्ययन के अनुसार, 1970 के दशक की तुलना में अब गर्मी के कारण नींद प्रभावित होने के घंटे लगभग दोगुने हो गए हैं. यह संकेत देता है कि समय के साथ बढ़ते तापमान का असर लोगों के आराम और स्वास्थ्य पर लगातार बढ़ रहा है. रिपोर्ट में इस बदलाव को जलवायु परिवर्तन से जोड़कर देखा गया है.

स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है असर

रिपोर्ट इस ओर इशारा करती है कि बढ़ती रात की गर्मी केवल असुविधा का कारण नहीं है, बल्कि इससे लोगों की नियमित नींद का समय भी प्रभावित हो रहा है. भारत के कई बड़े शहरों में सामने आए ये आंकड़े बताते हैं कि जलवायु परिवर्तन का असर अब दैनिक जीवन में भी साफ दिखाई देने लगा है.