नई दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय ब्रिक्स समिट 2026 का समापन हो गया. बैठक में BRICS देशों से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई. इस दौरान सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया था, लेकिन विपक्षी दलों द्वारा शासित कई राज्यों के मुख्यमंत्री इसमें शामिल नहीं हुए. दूसरी ओर, BJP शासित राज्यों के कई मुख्यमंत्री भारत मंडपम पहुंचे और रात्रिभोज में शामिल हुए.
BRICS से जुड़े कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता समेत कई नेता शामिल हुए. इन नेताओं ने भारत मंडपम में आयोजित रात्रिभोज में भी हिस्सा लिया.
वहीं, विपक्षी दलों से जुड़े कई मुख्यमंत्री कार्यक्रम में नजर नहीं आए. उनके शामिल नहीं होने की कोई एक आधिकारिक वजह सामने नहीं आई है. तेलंगाना और हिमाचल प्रदेश से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी और सुखविंदर सिंह सुक्खू पहले से तय कार्यक्रमों में व्यस्त थे.
विपक्षी दलों के बड़े सरकारी कार्यक्रमों से दूरी बनाने का यह पहला मामला नहीं है. जुलाई 2024 में नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की बैठक में भी कई विपक्षी मुख्यमंत्रियों ने हिस्सा नहीं लिया था. उस समय कांग्रेस और INDIA ब्लॉक के कुछ नेताओं ने केंद्रीय बजट को गैर-NDA शासित राज्यों के लिए भेदभावपूर्ण बताते हुए बैठक का बहिष्कार किया था. इसी तरह 2023 में नई दिल्ली में आयोजित G20 डिनर में भी कांग्रेस शासित राज्यों के कई मुख्यमंत्री शामिल नहीं हुए थे.
BRICS समिट खत्म होने के बाद कांग्रेस ने बैठक के नतीजों और नई दिल्ली घोषणा को लेकर सवाल खड़े किए. कांग्रेस का कहना है कि शिखर सम्मेलन से जितनी उम्मीद थी, उसके मुकाबले उपलब्धियां कम रहीं. पार्टी ने दावा किया कि घोषणापत्र में अरुणाचल प्रदेश, लद्दाख और पहलगाम आतंकी हमले जैसे मुद्दों का पर्याप्त उल्लेख नहीं किया गया. कांग्रेस नेता नाना पटोले ने कहा कि भारत को चीन के साथ सीमा से जुड़े मुद्दों पर स्पष्ट रुख रखना चाहिए था.
कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने भी BRICS घोषणा-पत्र में आतंकवाद के मुद्दे को लेकर सवाल उठाए. उनका कहना था कि आतंकवाद की निंदा की गई है, लेकिन पहलगाम हमले के लिए जिम्मेदार लोगों या संगठन का स्पष्ट नाम नहीं बताया गया.
इस बार BRICS समिट 2026 में अंतरराष्ट्रीय मुद्दों के साथ घरेलू राजनीति भी चर्चा का विषय बन गई. एक तरफ भारत ने BRICS की अध्यक्षता के दौरान वैश्विक सहयोग, व्यापार, सुरक्षा और विकास पर जोर दिया, वहीं विपक्षी नेताओं की गैर-मौजूदगी और कांग्रेस की आलोचना ने राजनीतिक बहस को भी तेज कर दिया.