दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन को लेकर बड़ा दावा किया है. पुलिस सूत्रों के अनुसार, 20 से 25 जुलाई के बीच प्रदर्शन स्थल और उसके आसपास आपराधिक पृष्ठभूमि वाले 2873 लोगों की पहचान की गई है. यह दावा पुलिस द्वारा कराई गई वीडियोग्राफी, फेस रिकग्निशन तकनीक और अन्य तकनीकी विश्लेषण के आधार पर किया गया है. हालांकि, इस संबंध में दिल्ली पुलिस की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है.
पुलिस सूत्रों का कहना है कि चिन्हित लोगों की पहचान आधुनिक तकनीकी माध्यमों से की गई है. जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या इनमें शामिल लोग जंतर-मंतर और नई दिल्ली क्षेत्र में हुई कथित हिंसक घटनाओं में भी शामिल थे. जांच के दौरान यह भी देखा जा रहा है कि कुछ संदिग्ध प्रदर्शन स्थल पर एक से अधिक बार पहुंचे थे या नहीं.
सूत्रों के मुताबिक, चिन्हित लोगों में ऐसे व्यक्ति भी शामिल बताए जा रहे हैं जिनके खिलाफ हत्या, यौन उत्पीड़न और पॉक्सो (POCSO) जैसे गंभीर मामलों में पहले से मुकदमे दर्ज हैं. पुलिस अब इनकी गतिविधियों, आपसी संपर्क और प्रदर्शन के दौरान उनकी भूमिका की विस्तृत पड़ताल कर रही है. यदि जांच में किसी की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है.
पुलिस सूत्रों का कहना है कि वीडियोग्राफी, डिजिटल साक्ष्यों और अन्य तकनीकी इनपुट के आधार पर चिन्हित लोगों के खिलाफ आगे की कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की जा रही है. जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था प्रभावित करने में किन लोगों की भूमिका रही.
दूसरी ओर, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने सरकार पर छात्रों की आवाज दबाने का आरोप लगाया है. पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि यदि विभिन्न राज्यों में गिरफ्तार छात्रों को रिहा नहीं किया गया और उनके खिलाफ दर्ज FIR वापस नहीं ली गईं, तो संगठन दोबारा आंदोलन शुरू करेगा. उनका आरोप है कि सरकार ने पहले आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक उस पर अमल नहीं हुआ.
CJP ने सरकार से मांग की है कि प्रदर्शन को लेकर हुए कथित समझौते की लिखित प्रति सार्वजनिक की जाए. संगठन का कहना है कि यदि तय समय तक लिखित आश्वासन साझा नहीं किया गया और गिरफ्तार छात्रों व प्रदर्शनकारियों की रिहाई सुनिश्चित नहीं हुई, तो आंदोलन फिर से शुरू किया जाएगा. फिलहाल, एक ओर पुलिस अपनी जांच आगे बढ़ा रही है, जबकि दूसरी ओर प्रदर्शनकारी संगठन सरकार पर अपने वादे निभाने का दबाव बना रहे हैं.