अमित शाह की चेतावनी का असर, डेडलाइन से पहले ही 25 लाख का इनामी टॉप नक्सली कमांडर पापा राव करेगा सरेंडर

बस्तर का टॉप नक्सली कमांडर पापा राव 17 साथियों के साथ सरेंडर कर सकता है. अमित शाह की 31 मार्च की डेडलाइन और सुरक्षा दबाव के चलते यह फैसला लिया गया है.

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Km Jaya

बस्तर: छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र से एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां टॉप माओवादी कमांडर पापा राव आज अपने 17 साथियों के साथ आत्मसमर्पण कर सकता है. पापा राव पर सरकार ने 25 लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा है और वह लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों के निशाने पर था. यह सरेंडर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा तय की गई डेडलाइन से पहले होने जा रहा है.

सूत्रों के मुताबिक लगातार बढ़ते सुरक्षा दबाव और ऑपरेशन के चलते पापा राव ने सरेंडर का रास्ता चुना है. उसने एक स्थानीय पत्रकार के जरिए प्रशासन से संपर्क किया है. पापा राव जिसे सुनाम चंद्रैया, मंगू दादा और चंद्रन्ना के नाम से भी जाना जाता है, स्टेट जोनल कमेटी का सदस्य और वेस्ट बस्तर डिवीजन का प्रभारी रहा है.

गृह मंत्री अमित शाह ने क्या कहा था?

गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में नक्सलवाद के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए साफ कहा था कि 31 मार्च 2026 तक देश को पूरी तरह नक्सल मुक्त बनाया जाएगा. उन्होंने नक्सलियों को चेतावनी दी थी कि वे तय समय सीमा के भीतर आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौट आएं, अन्यथा सुरक्षा बलों की कार्रवाई और तेज कर दी जाएगी. सरकार ने यह भी स्पष्ट किया था कि हिंसा जारी रखने वालों के खिलाफ सख्त ऑपरेशन जारी रहेंगे.

कहां छिपा है पापा राव?

खुफिया जानकारी के अनुसार पापा राव इस समय इंद्रावती नेशनल पार्क के आसपास के इलाके में छिपा हुआ है, जो छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र की सीमा पर स्थित है. पहले उसके साथ 30 से 35 हथियारबंद नक्सली हुआ करते थे लेकिन हालिया कार्रवाई के बाद अब उसका समूह घटकर 17 लोगों तक रह गया है.

सुरक्षा बलों के लगातार ऑपरेशन ने उसके नेटवर्क को काफी कमजोर कर दिया है. बीजापुर में हाल ही में हुई मुठभेड़ों में उसके करीबी सहयोगी दिलीप बेदजा समेत 6 नक्सली मारे गए, जिससे संगठन को बड़ा झटका लगा है. इसके बाद से पापा राव पर दबाव और बढ़ गया है.

पुलिस ने क्या बताया?

पुलिस अधिकारियों के अनुसार बस्तर में नक्सलियों की मौजूदगी अब छोटे-छोटे समूहों तक सीमित रह गई है. इंद्रावती और अबूझमाड़ क्षेत्र में सर्च ऑपरेशन तेज कर दिए गए हैं. लगातार हो रही गिरफ्तारियों और सरेंडर के कारण नक्सली नेटवर्क तेजी से सिमट रहा है.