पिता के सामने आई बेटे-बहू और पोतों की लाखें, ताबूतों में लौटा छुट्टियां मनाने निकला परिवार
हिमाचल प्रदेश के चंबा में हुए दर्दनाक सड़क हादसे में छत्तीसगढ़ के एक परिवार की 4 जिंदगियां खत्म हो गईं. आईटी इंजीनियर अरविंद चंद्राकर, उनकी पत्नी और दो बेटों के शव जब गांव पहुंचे तो पूरा इलाका गम में डूब गया. पिता के सामने बेटे, बहू और पोतों की अर्थियां उठीं तो हर किसी की आंखें भर आईं.
छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले का छोटा सा गांव कुथरेल इन दिनों गहरे शोक में डूबा हुआ है. गांव के लोगों ने ऐसा दर्दनाक नजारा शायद पहले कभी नहीं देखा था. एक साथ चार एंबुलेंस गांव में दाखिल हुईं और हर एंबुलेंस में एक शव था. किसी में बेटा था, किसी में बहू और दो में मासूम पोते. जैसे ही यह खबर गांव में फैली, लोग अपने घरों से निकलकर पंचायत भवन की ओर दौड़ पड़े. यह दर्दनाक हादसा हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में हुआ था. 29 मई की रात बैरागढ़ साच पास किलाड़ मार्ग पर एक कार अचानक करीब 500 मीटर गहरी खाई में गिर गई. दुर्घटना इतनी भीषण थी कि कार में सवार सभी आठ लोगों की मौके पर ही मौत हो गई. इनमें से चार लोग छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के चंद्राकर परिवार के सदस्य थे.
खाई में गिरी कार
मृतकों में अरविंद चंद्राकर, उनकी पत्नी प्राची चंद्राकर और उनके दो बेटे दर्श तथा अक्षद शामिल थे. अरविंद पेशे से आईटी इंजीनियर थे और बेंगलुरु में काम करते थे. करीब दो दशक से वह आईटी क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहे थे. परिवार के लोग बताते हैं कि अरविंद ने अपनी मेहनत और लगन से एक सफल जीवन बनाया था. पत्नी और दोनों बच्चे भी उनके साथ बेंगलुरु में रहते थे और परिवार खुशहाल जीवन बिता रहा था. बताया गया कि परिवार हाल ही में एक अंतरराष्ट्रीय ताइक्वांडो प्रतियोगिता में शामिल हुआ था. इसके बाद उन्होंने हिमाचल प्रदेश घूमने का कार्यक्रम बनाया. परिवार के लिए यह यात्रा यादगार बनने वाली थी, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था. किसी ने नहीं सोचा था कि यह सफर उनकी जिंदगी का आखिरी सफर साबित होगा.
एक ही परिवार के 4 लोगों की मौत
हादसे के बाद राहत और बचाव कार्य शुरू किया गया, लेकिन दुर्घटना स्थल बेहद दुर्गम इलाके में होने के कारण शवों को निकालने में काफी समय लगा. गहरी खाई और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बीच बचाव दल ने कई घंटों तक मेहनत की. सभी जरूरी कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद मंगलवार को चारों शव रायपुर एयरपोर्ट लाए गए. रायपुर से 4 अलग अलग एंबुलेंसों के जरिए शवों को उनके पैतृक गांव कुथरेल पहुंचाया गया. गांव में जैसे ही एंबुलेंस पहुंचीं, माहौल पूरी तरह बदल गया. चारों ओर सन्नाटा और मातम का माहौल था. लोग खामोशी से खड़े होकर उस दृश्य को देख रहे थे, जिसे शब्दों में बयां करना मुश्किल था.