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'60 प्रतिशत जमा करो, किस्त हम भरेंगे', EMI भरने का सपना दिखाकर 3 करोड़ की ठगी; फर्जी लोन स्कीम का खुलासा

अंबिकापुर में एक फर्जी लोन कंपनी ने लोगों को होम लोन और EMI भरने का झांसा देकर 3 करोड़ रुपए से अधिक की ठगी कर ली. शिक्षिका समेत 9 लोग इस योजना का शिकार बने. चलिए जानते हैं क्या लिया गया एक्शन.

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Km Jaya

अंबिकापुर: छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में 'होम लोन का एक धोखेबाज खेल' सामने आया है, जिसमें लोगों को घर दिलाने में मदद करने के बहाने करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी की गई. आरोपी लोगों से कहता था, 'हम आपके लिए लोन दिलवा देंगे. आपको बस उस रकम का 60 प्रतिशत हमारी कंपनी में जमा करना होगा. उसके बाद EMI की चिंता करना छोड़ दें.

किश्तें कंपनी खुद भरेगी.' सुनने में यह स्कीम बहुत शानदार लगती थी लेकिन पुलिस के मुताबिक यही स्कीम करोड़ों की धोखाधड़ी का एक जाल साबित हुई. यह घटना सरगुजा जिले के गांधीनगर पुलिस थाना क्षेत्र की है. पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है, जिसकी पहचान शिवशंकर दास के रूप में हुई है.

आरोप है कि उसने लोगों को अपने जाल में फंसाने के लिए 'अंशिवार्य फाउंडेशन ग्रुप' नाम की एक कंपनी बनाई थी और आखिरकार उसने नौ लोगों जिनमें एक स्कूल टीचर भी शामिल है. उससे ₹3 करोड़ से ज्यादा की धोखाधड़ी की.

कैसे शुरू हुई धोखाधड़ी?

बलरामपुर जिले के राजपुर ब्लॉक में तैनात एक स्कूल टीचर, दिव्या अपना घर बनाना चाहती थीं. उन्होंने जमीन पहले ही खरीद लिया था और होम लोन की तलाश में थीं. ठीक इसी समय एक जान-पहचान वाले ने उन्हें शिवशंकर दास के बारे में बताया. शिवशंकर ने खुद को एक ऐसी कंपनी का डायरेक्टर बताया जो जरूरतमंद लोगों को आसानी से लोन दिलवाने का काम करती है. 

पुलिस ने क्या बताया?

आरोपी ने WhatsApp के जरिए उससे जरूरी दस्तावेज मांगे और हासिल कर लिए. उसने शिक्षिका से कई बैंक फॉर्मों पर दस्तखत करवाए और उसके बाद अलग-अलग बैंकों से कुल ₹41 लाख से ज्यादा के लोन ले लिए.

जैसे ही लोन की रकम खाते में जमा हुई, आरोपी उस पर अपनी कंपनी में पैसे जमा करने का दबाव बनाने लगा. लगभग ₹28 लाख अलग-अलग खातों में ट्रांसफर किए गए. सब कुछ असली दिखाने के लिए आरोपी ने शुरुआती कुछ महीनों तक EMI भी चुकाई, ताकि किसी को शक न हो लेकिन धीरे-धीरे सच्चाई सामने आने लगी. जब पैसों और EMI चुकाने में गड़बड़ियां सामने आईं, तो शिक्षिका को एहसास हुआ कि उसके साथ धोखा हुआ है. उसने मई में गांधीनगर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई.

जांच में क्या आया सामने?

पुलिस ने जांच शुरू की आरोपी जिसकी पहचान शिवशंकर दास के रूप में हुई. उसको हिरासत में लिया. पूछताछ के दौरान आरोपी ने बताया कि वह पहले पत्थर तोड़ने के कारोबार में काम करता था. अपने कारोबार में आर्थिक नुकसान होने के बाद उसे पैसों की जरूरत पड़ी. जिसके वजह से उसने एक धोखेबाजी वाली योजना बनाई और लोगों को फंसाना शुरू कर दिया. पुलिस जांच में पता चला कि नौ और लोग भी इसी योजना का शिकार हुए थे.