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DMF घोटाले को लेकर EOW की बड़ी कार्रवाई, 14 जगहों पर एक साथ छापे मारे, सभी दस्तवेज जब्त

भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई में छत्तीसगढ़ पुलिस की ईओडब्ल्यू ने बुधवार को चार जिलों में 14 जगहों पर छापे मारे. यह कार्रवाई DMF घोटाले से जुड़ी है, जिसमें माइनिंग प्रभावित क्षेत्रों के विकास फंड के दुरुपयोग का आरोप है.

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Princy Sharma

छत्तीसगढ़: भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई में छत्तीसगढ़ पुलिस की इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (EOW) ने बुधवार को राज्य के चार जिलों में 14 जगहों पर एक साथ छापे मारे. ये छापे डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन (DMF) घोटाले की चल रही जांच का हिस्सा हैं, जिसमें माइनिंग से प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोगों की भलाई के लिए दिए गए फंड का गलत इस्तेमाल शामिल है.

अधिकारियों के मुताबिक, यह छापेमारी प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट, 1988 (2018 में बदला गया) और इंडियन पीनल कोड की कई धाराओं के तहत की गई, जिसमें धोखाधड़ी, जालसाजी और क्रिमिनल साजिश शामिल है. EOW टीमों ने रायपुर में छह, दुर्ग-भिलाई में दो, राजनांदगांव में पांच और धमतरी में एक जगह पर छापेमारी की, जिसमें उन कंपनियों और लोगों को टारगेट किया गया जिन पर नकली ट्रांजैक्शन के जरिए DMF फंड में हेरफेर करने का शक था. 

प्रॉपर्टी के दस्तावेज किए जब्त

ऑपरेशन के दौरान, जांच करने वालों ने बड़ी मात्रा में डिजिटल और कागजी सबूत जब्त किए, जिनमें हार्ड ड्राइव, बैंक रिकॉर्ड, मोबाइल फोन और प्रॉपर्टी के दस्तावेज शामिल हैं. अधिकारियों ने कहा कि इनमें से कई रिकॉर्ड DMF प्रोजेक्ट्स के तहत वर्क ऑर्डर के बदले सरकारी अधिकारियों को किए गए गैर-कानूनी पेमेंट की ओर इशारा करते हैं. खबरों के मुताबिक, इन डॉक्यूमेंट्स में नकली बिलिंग, जाली वाउचर और GST रिटर्न में हेरफेर करके जनता का पैसा निकालने का भी खुलासा हुआ है.


बड़े पैमाने पर जांच शुरू

इस स्कैम में शामिल पूरे नेटवर्क का पता लगाने के लिए अब फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स जब्त किए गए डेटा की जांच कर रहे हैं. EOW ने कहा कि एनालिसिस पूरा होने के बाद और नाम जांच के दायरे में आ सकते हैं और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं. DMF फंड माइनिंग रेवेन्यू से इकट्ठा किया जाता है और इसका मकसद माइनिंग से प्रभावित इलाकों में लोगों की जिंदगी को बेहतर बनाना है.  हालांकि, इन फंड्स के करप्शन और गलत इस्तेमाल की कई शिकायतों की वजह से यह बड़े पैमाने पर जांच शुरू हुई है. अधिकारियों ने मौजूदा छापों को जांच का जरूरी और एडवांस्ड स्टेज बताया. कई फर्मों, कॉन्ट्रैक्टर्स और यहां तक ​​कि सरकारी अधिकारियों की भी अब स्कैम में उनकी संभावित भूमिका के लिए बारीकी से जांच की जा रही है.